75 साल का रिकॉर्ड टूटा- राजस्थान भी पीछे छूटा, जब पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा तपा बुंदेलखंड का यह इलाका|
उत्तर प्रदेश के बांदा में गर्मी ने 75 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जबकि दिल्ली-एनसीआर में अगले दो दिनों तक गंभीर लू चलने की मौसम विभाग की चेतावनी है।

भीषण गर्मी और तेज धूप से बचने के लिए अपने चेहरे को सफेद कपड़ों से ढककर चलते हुए आगंतुक।
उत्तर और मध्य भारत के एक बहुत बड़े भूभाग पर इस समय सूर्यदेव का प्रचंड प्रकोप देखने को मिल रहा है। समूचा मैदानी इलाका भीषण तपन और झुलसाने वाली गर्म हवाओं की चपेट में आकर पूरी तरह से सुलग उठा है। इस मौसमी आपदा के बीच सबसे हैरान करने वाले आंकड़े उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र से सामने आ रहे हैं, जहां ऐतिहासिक रूप से सबसे गर्म माने जाने वाले राजस्थान के रेगिस्तानी जिलों को पछाड़कर उत्तर प्रदेश का बांदा जिला इस समय पूरे देश की सबसे गर्म जगह बन चुका है। बुंदेलखंड की यह धरती न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अत्यधिक और जानलेवा तापमान के नए रिकॉर्ड स्थापित कर रही है, जिसने मौसम वैज्ञानिकों से लेकर स्थानीय प्रशासन तक सभी को गहरी चिंता में डाल दिया है।
मौसम विभाग से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि बुंदेलखंड के बांदा जिले में पिछले एक महीने के भीतर लगातार दूसरी बार रिकॉर्ड तोड़ मौसमी उथल-पुथल देखी गई है। बांदा में दिन का अधिकतम तापमान सैंतालीस दशमलव छह डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जो पिछले पिचहत्तर वर्षों के इतिहास में मई महीने के मध्य में दर्ज किया गया अब तक का सबसे उच्चतम और अभूतपूर्व तापमान स्तर है। इससे पहले अप्रैल के अंतिम सप्ताह में भी इस जिले ने इसी तरह के चरम तापमान का सामना किया था। इस असाधारण मौसमी घटना के कारण बांदा न सिर्फ भारत बल्कि संपूर्ण वैश्विक मानचित्र पर इस समय सबसे गर्म शहरों की सूची में शीर्ष स्थानों पर शामिल हो गया है, जो इस क्षेत्र में बढ़ते पर्यावरण संकट की ओर साफ इशारा करता है।
इस भयंकर तपन का प्रभाव केवल उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और संपूर्ण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र भी इसकी सीधी मार झेल रहा है। दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में पिछले कई दिनों से लगातार जारी गंभीर लू की स्थिति को देखते हुए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने अपनी तात्कालिक चेतावनी प्रणाली के स्तर को बढ़ाते हुए येलो अलर्ट के स्थान पर ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। दिल्ली और उसके आस-पास के उपनगरीय शहरों जैसे नोएडा और गाजियाबाद में पारा छियालीस डिग्री सेल्सियस के खतरनाक स्तर को छू रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगले दो दिनों तक क्षेत्र में लू से लेकर गंभीर लू यानी 'हीटवेव से सिवियर हीटवेव' जैसी अत्यंत कठिन परिस्थितियां बनी रहेंगी और इसके बाद भी अगले सात दिनों तक तापमान में किसी प्रकार की बड़ी गिरावट या राहत के कोई संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं।
निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर के विशेषज्ञों और वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत में अचानक बढ़े इस तापमान की मुख्य तकनीकी वजह वर्तमान में किसी भी सक्रिय मौसम प्रणाली का पूरी तरह से अभाव होना है। इस समय उत्तर-पश्चिम भारत के वायुमंडल में कोई भी मजबूत पश्चिमी विक्षोभ या चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय नहीं है, जो मैदानी इलाकों को ठंडी हवाएं या बारिश दे सके। इसके विपरीत, पाकिस्तान और थार रेगिस्तान की ओर से आने वाली अत्यधिक गर्म और पूरी तरह से शुष्क पछुआ हवाएं निर्बाध गति से बीस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दिल्ली-एनसीआर और गंगा के मैदानी क्षेत्रों की ओर बढ़ रही हैं। यह शुष्क हवाएं पूरे वातावरण को एक बंद भट्ठी की तरह तपा रही हैं, जिससे न्यूनतम तापमान भी सामान्य से काफी ऊपर बना हुआ है और रातें भी झुलसाने वाली महसूस हो रही हैं।
इस बेहद गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय नागरिक प्रशासनों ने आपातकालीन गाइडलाइंस जारी की हैं। मौसम विभाग के राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों ने इसकी पुष्टि की है कि दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के एक बहुत बड़े हिस्से में पारा पैंतालीस डिग्री सेल्सियस की लक्ष्मण रेखा को पार कर चुका है। इस जानलेवा लू के कारण सरकारी अस्पतालों में हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और तेज बुखार के मरीजों की संख्या में अचानक भारी उछाल आया है। प्रशासन ने दोपहर के समय श्रमिकों से खुले में काम कराने पर पाबंदी लगाने और आम जनता को केवल अत्यंत आवश्यक कार्यों के लिए ही घरों से बाहर निकलने की आधिकारिक सलाह दी है। यदि आगामी दिनों में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं होता है, तो यह मौसमी संकट मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ जल और बिजली आपूर्ति की बुनियादी व्यवस्था को पूरी तरह से ठप कर सकता है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
