आसमान में उड़ते जहाजों से निकलने वाला धुआं इन दिनों एक खतरनाक बहस का केंद्र बन गया है। Conspiracy theories के अनुसार, यह धुआं केवल इंजन का exhaust नहीं, बल्कि इसमें Pathogens जैसे bacteria, virus, fungi या chemicals मिलाए जाते हैं, जिनका उद्देश्य आबादी को बीमार करना या उनकी immunity को कमजोर करना बताया जाता है।

इन दावों को Bio-warfare के संदर्भ में भी जोड़ा जाता है, जहां किसी भी biological agent जैसे Anthrax या किसी virus को हवा में फैलाने के लिए उसे Aerosol यानी बेहद बारीक कणों में बदलना जरूरी होता है, ताकि वह सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सके। हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टि से यह प्रक्रिया अत्यंत जटिल मानी जाती है, खासकर तब जब जहाज 30,000 से 40,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे होते हैं। इस ऊंचाई पर तापमान -40°C से -50°C तक होता है, जहां इतनी ठंड और engine exhaust की तीव्र गर्मी के बीच अधिकांश biological agents तुरंत निष्क्रिय हो जाते हैं।

इसके अलावा, Bio-warfare का एक बड़ा जोखिम इसकी अनिश्चितता है। हवा का रुख लगातार बदलता रहता है, जिससे यदि कोई देश किसी दूसरे देश पर हवा या बारिश के माध्यम से virus छोड़ता है, तो उसके वापस उसी देश में लौटने की संभावना बनी रहती है। साथ ही, इतनी ऊंचाई से गिरते समय chemicals हवा में अत्यधिक dilute हो जाते हैं, जिससे जमीन तक पहुंचते-पहुंचते उनका प्रभाव लगभग समाप्त हो जाता है।

वर्तमान समय में detection और monitoring की आधुनिक प्रणालियां भी इन दावों को चुनौती देती हैं। हर देश का मौसम विभाग, जैसे भारत का IMD, और pollution control boards नियमित रूप से हवा और बारिश के पानी के नमूनों की जांच करते हैं। यदि किसी भी प्रकार का abnormal chemical या unknown virus पाया जाता, तो वह तुरंत global health organizations और प्रयोगशालाओं में सामने आ जाता। अब तक किसी भी देश में ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, be-mausam barish का असली कारण Bio-war नहीं, बल्कि Climate Change और Global Warming है। बढ़ते तापमान के कारण समुद्री हवाएं और moisture अपने पैटर्न बदल रहे हैं, जिससे अनियमित बारिश और hailstorms जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। इसका प्रभाव सीधे तौर पर खेती और फसलों पर पड़ रहा है, जो एक गंभीर आर्थिक चिंता का विषय बन चुका है।

निष्कर्ष के रूप में, Chemtrails के जरिए Bio-warfare के दावे इंटरनेट पर भले ही व्यापक रूप से फैल रहे हों, लेकिन वैज्ञानिक आधार पर यह theory बेहद कमजोर मानी जाती है। अधिकांश डॉक्टर और वैज्ञानिक इन घटनाओं को मौसमी बदलाव और seasonal flu से जोड़कर देखते हैं, न कि किसी सुनियोजित साजिश से।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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