नई दिल्ली: मार्च का महीना अभी अपने शुरुआती दौर में ही है, लेकिन उत्तर भारत के राज्यों में मौसम के तेवर हैरान करने वाले हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में इस समय तापमान सामान्य से बहुत अधिक दर्ज किया जा रहा है। आमतौर पर मार्च के पहले हफ्ते में जो ठंडक महसूस होती थी, वह इस बार पूरी तरह गायब है और उसकी जगह चिलचिलाती धूप ने ले ली है।

पहाड़ों पर गर्मी का जबरदस्त असर

सबसे ज्यादा चौंकाने वाले आंकड़े पहाड़ी राज्यों से सामने आ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश जैसे ठंडे प्रदेशों में तापमान सामान्य से 6°C से 12°C तक अधिक बना हुआ है।

  • जम्मू-कश्मीर: घाटी में दिन का तापमान सामान्य से काफी ऊपर चला गया है, जिससे समय से पहले बर्फ पिघलने का खतरा बढ़ गया है।
  • हिमाचल प्रदेश: कई ऊंचे इलाकों में तापमान में भारी बढ़ोत्तरी देखी गई है। मौसम विभाग ने हिमाचल के कुछ हिस्सों में 'हीट वेव' (लू) जैसी स्थिति की चेतावनी भी जारी की है।
  • उत्तराखंड: यहां भी पारा सामान्य से 5-8 डिग्री अधिक बना हुआ है।


मैदानी इलाकों में कैसा है हाल?

उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों—पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर में भी गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है।

  • तापमान का स्तर: अधिकांश मैदानी शहरों में अधिकतम तापमान 33°C से 36°C के बीच पहुंच गया है। राजस्थान के जैसलमेर और जोधपुर जैसे जिलों में पारा 38-40°C के करीब पहुंचने की संभावना है।
  • गर्म और शुष्क हवाएं: दिन के समय 15 से 25 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाली हवाएं वातावरण को और शुष्क बना रही हैं।
  • दिल्ली की स्थिति: राजधानी में शनिवार को अधिकतम तापमान 35.7°C दर्ज किया गया, जो पिछले 15 सालों में मार्च के पहले हफ्ते का सबसे अधिक तापमान है।

क्या होगी बारिश या बर्फबारी?

तपते मैदानों के बीच पहाड़ों के लिए राहत की एक हल्की किरण भी है। मौसम विभाग के मुताबिक, एक 'कमजोर पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) सक्रिय हो रहा है।

इसके प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में छिटपुट बारिश या हल्की बर्फबारी होने की संभावना है।

हालांकि, यह सिस्टम इतना मजबूत नहीं है कि मैदानी इलाकों के तापमान को कम कर सके। मैदानी इलाकों में अगले एक हफ्ते तक मौसम शुष्क और गर्म बना रहने का अनुमान है।

क्यों हो रहा है ऐसा बदलाव?

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस साल सर्दियों के अंत में पहाड़ों पर कम बर्फबारी और मैदानों में बारिश की कमी (Rainfall Deficiency) के कारण जमीन जल्दी गर्म हो गई है। साथ ही, एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से गर्म हवाएं सीधे उत्तर भारत की ओर रुख कर रही हैं, जिससे पारे में यह असामान्य उछाल देखने को मिल रहा है।

आम जनजीवन पर प्रभाव और सावधानी

अचानक बढ़ी इस गर्मी का सीधा असर सेहत और खेती पर पड़ रहा है।

  • सेहत: शरीर में पानी की कमी (Dehydration) और थकान की शिकायतें बढ़ सकती हैं। दोपहर के समय बाहर निकलने पर सिर ढक कर रखें।
  • खेती: गेहूं की फसल के लिए समय से पहले बढ़ती गर्मी नुकसानदायक हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे।

उत्तर भारत में गर्मी ने इस बार समय से काफी पहले दस्तक दे दी है। अगले कुछ दिनों तक तापमान में बड़ी गिरावट की संभावना कम है, इसलिए बढ़ते पारे के साथ तालमेल बिठाना अब जरूरी हो गया है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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