नई दिल्ली, 10 मार्च 2026

उत्तर भारत में कुदरत के दो चेहरे—मैदान तप रहे, पहाड़ जम रहे

उत्तर भारत के भूगोल में इस समय मौसम के दो बेहद विपरीत रूप देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां पहाड़ों की चोटियों पर कुदरत सफेद मखमली बर्फ की चादर बिछा रही है, वहीं दूसरी ओर मैदानी इलाकों के लोग मार्च की शुरुआत में ही जून जैसी चुभती गर्मी का सामना करने को मजबूर हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह स्थिति आने वाले कुछ दिनों तक इसी तरह बनी रह सकती है।

मैदानी राज्यों में 'समय से पहले' गर्मी का टॉर्चर

दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पिछले 48 घंटों में तापमान में जबरदस्त उछाल देखा गया है। आमतौर पर मार्च के महीने में जो ठंडक महसूस होती थी, वह अब पूरी तरह गायब हो चुकी है।

  • दिल्ली और एनसीआर: देश की राजधानी में पारा 36°C से 38°C के बीच झूल रहा है। सुबह 11 बजे के बाद ही धूप इतनी तेज हो जाती है कि लोगों का बाहर निकलना दूभर हो रहा है।
  • राजस्थान का हाल: मरुस्थलीय राज्य राजस्थान के कई जिलों जैसे जैसलमेर और बाड़मेर में तापमान 40°C के करीब पहुंचने की कोशिश कर रहा है। यहां गर्म हवाओं का चलना भी शुरू हो गया है, जो रबी की फसलों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
  • उत्तर प्रदेश: यूपी के पश्चिमी और मध्य इलाकों में भी तापमान सामान्य से 5-6 डिग्री अधिक दर्ज किया गया है। रातें अब पहले जैसी ठंडी नहीं रही हैं और पंखे-कूलर की जरूरत महसूस होने लगी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मैदानी इलाकों में इस समय आसमान पूरी तरह साफ है और शुष्क हवाएं चल रही हैं, जिसके कारण सूरज की किरणें सीधे जमीन को तपा रही हैं।

पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा: बर्फबारी और बारिश

मैदानों की तपिश के ठीक उलट, हिमालयी क्षेत्रों में अभी भी सर्दियों का अहसास बरकरार है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा हिमपात (Snowfall) दर्ज किया गया है।

  • जम्मू-कश्मीर: गुलमर्ग, सोनमर्ग और पहलगाम जैसे पर्यटन स्थलों पर हल्की से मध्यम बर्फबारी जारी है। इससे सैलानियों के चेहरे तो खिल उठे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने फिसलन और ठंड को लेकर एडवाइजरी जारी की है।
  • हिमाचल प्रदेश: लाहौल-स्पीति और किन्नौर के ऊपरी हिस्सों में बर्फ की परत जम गई है। निचले इलाकों में गरज के साथ हल्की बारिश हो रही है, जिससे वहां का तापमान अभी भी काफी कम बना हुआ है।
  • उत्तराखंड: केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के ऊपरी चोटियों पर बर्फ की फुहारें गिरने की खबरें हैं।

पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का असर

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्र के ऊपर से गुजर रहा है। यही कारण है कि पहाड़ों पर नमी और बादल छाए हुए हैं, जिससे वहां बारिश और बर्फबारी हो रही है। हालांकि, यह सिस्टम इतना मजबूत नहीं है कि मैदानी इलाकों तक पहुंचकर तापमान को नीचे ला सके। अगले 3 से 4 दिनों तक पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में इस विक्षोभ का असर बना रहेगा, जिससे वहां मौसम सुहाना रहेगा।

खेती और स्वास्थ्य पर प्रभाव

मौसम के इस दोहराव का सीधा असर आम जनजीवन पर पड़ रहा है।

  • फसलों पर संकट: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च में बढ़ती गर्मी गेहूं की फसल के लिए हानिकारक हो सकती है। यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो दाने समय से पहले पक कर सूख सकते हैं, जिससे पैदावार में कमी आने की आशंका है।
  • सेहत की चिंता: सुबह और रात के तापमान में भारी अंतर के कारण लोगों में सर्दी-जुकाम और वायरल बुखार के मामले बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि अचानक ठंडे पानी के सेवन और तेज धूप से बचने की कोशिश करें।

अगले 5 दिनों का अनुमान

मौसम विभाग की मानें तो अगले 72 घंटों तक मैदानी इलाकों में राहत की कोई उम्मीद नहीं है। राजस्थान से आने वाली गर्म हवाएं दिल्ली-यूपी में गर्मी को और बढ़ाएंगी। वहीं, पहाड़ों पर 13 मार्च तक रुक-रुक कर बारिश और बर्फबारी का दौर चलता रहेगा।

प्रकृति के ये दो अलग-अलग रंग हमें याद दिलाते हैं कि जलवायु परिवर्तन का असर अब हर मौसम में साफ़ तौर पर दिखने लगा है। जहाँ एक तरफ बर्फीली हवाएं हैं, वहीं दूसरी तरफ जलती दोपहर—उत्तर भारत फिलहाल इसी 'दोहरी मार' के बीच खड़ा है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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