दिल्ली में समय से पहले गर्मी का प्रचंड प्रहार

नई दिल्ली:

राजधानी दिल्ली में इस बार कुदरत के तेवर कुछ बदले-बदले नजर आ रहे हैं। अभी मार्च का दूसरा सप्ताह शुरू ही हुआ है और दिल्लीवासियों को मई-जून जैसी तपिश का अहसास होने लगा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में गर्मी ने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। सफदरजंग वेधशाला, जो दिल्ली का मुख्य मौसम केंद्र है, वहां तापमान सामान्य से 7 से 8 डिग्री सेल्सियस ऊपर दर्ज किया जा रहा है।

50 साल का रिकॉर्ड टूटा

मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च के पहले सप्ताह में दर्ज किया गया तापमान पिछले 50 वर्षों में सबसे अधिक है। शनिवार और रविवार को दिल्ली के कुछ इलाकों, विशेषकर 'रिज' क्षेत्र और 'नरेला' में अधिकतम तापमान 38.9°C तक जा पहुंचा। इससे पहले मार्च के शुरुआती दिनों में इतना अधिक तापमान साल 1999 में देखा गया था, लेकिन इस बार की गर्मी ने उस रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।

क्यों तप रही है दिल्ली?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस अचानक बढ़ी गर्मी के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:

  • साफ आसमान: आसमान पूरी तरह साफ है, जिससे सूरज की किरणें सीधे धरती पर पहुंच रही हैं और सतह को तेजी से गर्म कर रही हैं।
  • बारिश की कमी: फरवरी और मार्च की शुरुआत में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय न होने के कारण बारिश बिल्कुल नहीं हुई है, जिससे हवा में नमी कम हो गई है और खुश्की बढ़ गई है।
  • एंटी-साइक्लोनिक हवाएं: उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर बने एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से गर्म हवाएं दिल्ली-एनसीआर की ओर रुख कर रही हैं।


आगामी दिनों का पूर्वानुमान

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले 48 घंटों तक राहत की कोई उम्मीद नहीं है। तापमान 36°C से 39°C के बीच रहने का अनुमान है। हालांकि, 11 मार्च के बाद एक हल्का पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्रों में दस्तक दे सकता है, जिससे मैदानी इलाकों में बादल छा सकते हैं और तापमान में 2-3 डिग्री की मामूली गिरावट आ सकती है। लेकिन फिलहाल, राजधानी में "हीटवेव" जैसी स्थिति बनी रहने की संभावना है।

गर्मी और लू से बचाव के जरूरी उपाय

जब तापमान मार्च में ही 38°C को पार कर जाए, तो स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरतना अनिवार्य हो जाता है। अचानक मौसम बदलने से शरीर का तापमान असंतुलित हो सकता है। यहाँ कुछ एक्सपर्ट टिप्स दिए गए हैं:

  • हाइड्रेशन है जरूरी: प्यास न लगने पर भी समय-समय पर पानी पीते रहें। शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो, इसके लिए नींबू पानी, ओआरएस (ORS), छाछ और नारियल पानी का सेवन करें।
  • सही पहनावा: बाहर निकलते समय हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें। सिर को ढंकने के लिए टोपी, छतरी या स्कार्फ का इस्तेमाल करें।
  • दोपहर में बाहर जाने से बचें: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब सूरज की तपिश सबसे अधिक होती है, कोशिश करें कि घर के अंदर ही रहें।
  • खान-पान का ध्यान: ज्यादा तला-भुना और मसालेदार भोजन खाने से बचें। मौसमी फल जैसे तरबूज, खरबूजा और खीरा अपनी डाइट में शामिल करें।

पर्यावरण पर प्रभाव

समय से पहले आई इस गर्मी का असर केवल जनजीवन पर ही नहीं, बल्कि कृषि पर भी पड़ रहा है। गेहूं की फसल जो इस समय पकने की कगार पर होती है, उसे इस अचानक बढ़े तापमान से नुकसान हो सकता है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसलों में हल्की सिंचाई जारी रखें ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे।


दिल्ली में मार्च की यह गर्मी आने वाले भीषण गर्मियों के सीजन की एक चेतावनी मात्र है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के चक्र में आ रहे ये बदलाव अब साल-दर-साल गंभीर होते जा रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि हम न केवल अपनी सेहत का ख्याल रखें, बल्कि पर्यावरण के प्रति भी जागरूक बनें।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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