वैश्विक जलवायु में बड़े बदलाव की दस्तक: 'सुपर अल नीनो' की वापसी से मौसम वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता

दुनिया भर के जलवायु विशेषज्ञ इस समय प्रशांत महासागर के बदलते मिजाज पर पैनी नजर रखे हुए हैं। संघीय अधिकारियों और मौसम विज्ञानियों की ताजा भविष्यवाणियां एक ऐसे संकेत की ओर इशारा कर रही हैं जो आगामी महीनों में वैश्विक मौसम के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है। नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के अनुसार, इस साल गर्मियों के दौरान अल नीनो के उभरने की प्रबल संभावना है, और कुछ मॉडल तो इसे 'ऐतिहासिक रूप से शक्तिशाली' यानी 'सुपर अल नीनो' की श्रेणी में रख रहे हैं।

अल नीनो मूल रूप से मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि की एक घटना है। यह चक्र हर दो से सात साल के भीतर घटित होता है, लेकिन जब समुद्र का तापमान सामान्य से 2.0 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ जाता है, तो इसे 'सुपर अल नीनो' का नाम दिया जाता है। वर्ष 1950 के बाद से अब तक दुनिया ने केवल चार बार ही ऐसी स्थिति का सामना किया है, जिसमें आखिरी बार 2015-16 के दौरान भयानक गर्मी और सूखे जैसे प्रभाव देखे गए थे। वर्तमान में NOAA ने 50 प्रतिशत संभावना व्यक्त की है कि इस साल की यह घटना 'मजबूत' या 'अत्यंत मजबूत' स्तर तक पहुँच सकती है।

इस जलवायु घटना का प्रभाव केवल तापमान बढ़ाने तक सीमित नहीं है। अमेरिका के संदर्भ में देखा जाए तो यह घटना शरद ऋतु के महीनों के दौरान अधिक सक्रिय होती है, जिससे देश के उत्तरी हिस्सों में गर्म और शुष्क सर्दियां आती हैं, जबकि दक्षिणी राज्यों में औसत से अधिक बारिश और ठंड देखी जाती है। हालांकि, यदि यह गर्मियों की शुरुआत में ही प्रभावी हो जाता है, तो यह रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और हीटवेव की आवृत्ति को बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल के रिकॉर्ड-तोड़ बसंत के बाद, अल नीनो का आगमन आग में घी डालने का काम करेगा।

कानूनी और आधिकारिक दृष्टिकोण से देखें तो कई राज्यों ने पहले ही प्राकृतिक आपदाओं की तैयारी शुरू कर दी है। मिसौरी के गवर्नर की ओर से 'आपातकाल की स्थिति' की घोषणा इसी बढ़ते खतरे का प्रमाण है। हालांकि NOAA ने स्पष्ट किया है कि एक 'मजबूत' अल नीनो का मतलब हमेशा अधिक चरम मौसम नहीं होता, लेकिन यह निश्चित रूप से खतरनाक मौसमी घटनाओं की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है। राहत की एक बात यह है कि एक मजबूत अल नीनो अटलांटिक महासागर में तूफान (Hurricane) के सीजन को शांत रख सकता है, जिससे तटीय इलाकों को भीषण चक्रवातों से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। अंततः, अल नीनो का यह संभावित प्रहार केवल एक मौसमी घटना नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, कृषि और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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