दक्षिण भारत में कमजोर पड़ा मानसून, तमिलनाडु समेत कई राज्यों में बढ़ी गर्मी और उमस|
दक्षिण भारत में मानसून की गतिविधियां उत्तर भारत की तुलना में कमजोर हैं, जिससे तमिलनाडु में सामान्य से अधिक गर्मी और उमस दर्ज की जा रही है।

वर्षा के बीच सड़क पर चलती हुई छात्राएं और दक्षिण भारत का मानचित्र तटीय क्षेत्रों में मौसम की स्थिति के संदर्भ में।
दक्षिण भारत के मौसम में एक बार फिर स्पष्ट बदलाव दर्ज किया जा रहा है, जहां देश के अन्य हिस्सों की तुलना में प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियां काफी हद तक कमजोर बनी हुई हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, आठ सितंबर को दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश की रफ्तार सुस्त है और मानसून का प्रभाव अपेक्षाकृत कमजोर नजर आ रहा है। बारिश की कमी के कारण इस क्षेत्र के कई इलाकों में तापमान में बढ़ोतरी के साथ-साथ उमस भरी गर्मी का असर साफ तौर पर महसूस किया जाने लगा है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
क्षेत्रीय मौसम की स्थिति पर नजर डालें तो तमिलनाडु राज्य में सितंबर महीने के इस दौर में सामान्य से अधिक गर्मी दर्ज की जा रही है। लगातार कमजोर पड़ रही मानसूनी हवाओं और बादलों की अनुपस्थिति के कारण यहां धूप तीखी बनी हुई है, जिससे तापमान सामान्य स्तर से ऊपर बना हुआ है। हालांकि, दक्षिण भारत के सभी हिस्सों में एक जैसी स्थिति नहीं है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ चुनिंदा तटीय क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर बादलों के बनने से हल्की या छिटपुट बारिश होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
विशेष तौर पर केरल के कुछ चुनिंदा जिलों में आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों में हल्की बढ़ोतरी होने के संकेत मिले हैं, जिससे वहां के स्थानीय निवासियों को उमस भरी गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके विपरीत, कर्नाटक और तटीय इलाकों में छिटपुट बौछारों को छोड़कर मौसम मुख्य रूप से शुष्क और गर्म बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि मानसून के इस चरण में प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर कम दबाव के क्षेत्रों का अभाव होने के कारण बारिश की गतिविधियां सिमट कर रह गई हैं, जो इस मौसम की सामान्य प्रवृत्ति का हिस्सा है।
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले कुछ और दिनों तक दक्षिण भारत के बड़े हिस्से में मौसम का मिजाज कमोबेश ऐसा ही बना रहने की संभावना है, जिसमें धूप और उमस का प्रभाव अधिक देखने को मिलेगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
