क्या इस बार रिकॉर्ड तोड़ेगी गर्मी? दक्षिण भारत में चढ़ता पारा और उमस का जानलेवा संगम!
दक्षिण भारतीय राज्यों में चढ़ते पारे और आर्द्रता के कारण बढ़ी उमस, मौसम विभाग ने तेज धूप और शुष्क मौसम को लेकर जारी की चेतावनी।

दक्षिण भारत में बढ़ते तापमान और तेज धूप से बचने के लिए सड़क पर चेहरे को स्कार्फ से ढंककर चलती महिलाएं।
दक्षिण भारत के राज्यों में इस वर्ष गर्मी का आगमन उम्मीद से अधिक तीव्र और कष्टदायक साबित हो रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रायद्वीपीय भारत के विशाल हिस्से में तापमान में निरंतर बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है। इस बार की गर्मी केवल चढ़ते पारे तक सीमित नहीं है, बल्कि कम बारिश और बढ़ते आर्द्रता स्तर (Humidity) के कारण पैदा हुई उमस ने लोगों का घरों से निकलना दूभर कर दिया है। केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए यह स्थिति एक दोहरी चुनौती बनकर उभरी है।
आमतौर पर दक्षिण भारत के तटीय इलाकों में समुद्री हवाओं के कारण तापमान मैदानी इलाकों की तुलना में स्थिर रहता है, लेकिन इस वर्ष वायुमंडलीय दबाव में आए बदलावों ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी युक्त हवाएं धरातल पर रुक रही हैं, जिससे उमस का स्तर 80 प्रतिशत से भी ऊपर चला गया है। जब तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास होता है और उमस अधिक होती है, तो शरीर को महसूस होने वाली वास्तविक गर्मी (Heat Index) 45 डिग्री के समान लगती है। यही कारण है कि लोग पसीने और चिपचिपी गर्मी से भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं।
बारिश की कमी ने इस संकट को और गहरा कर दिया है। अप्रैल के महीने में होने वाली छिटपुट मानसूनी पूर्व फुहारें इस बार नदारद हैं, जिससे धरातल की तपन कम नहीं हो पा रही है। चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों में कंक्रीट के बढ़ते ढांचे 'हीट ट्रैप' की तरह काम कर रहे हैं। विशेष रूप से बेंगलुरु, जो अपने सुहावने मौसम के लिए जाना जाता था, वहां भी अधिकतम तापमान सामान्य से तीन से चार डिग्री अधिक दर्ज किया जा रहा है। जल संकट की आहट के बीच बढ़ती गर्मी ने कृषि और पशुपालन क्षेत्र पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालना शुरू कर दिया है।
प्रशासनिक और कानूनी दृष्टिकोण से, राज्य सरकारों ने स्वास्थ्य विभाग को विशेष अलर्ट पर रखा है। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्रालयों ने हीट वेव से संबंधित बीमारियों के लिए जिला अस्पतालों में विशेष वार्ड आरक्षित करने के निर्देश जारी किए हैं। श्रम विभाग ने भी निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें दोपहर के समय काम के घंटों में कटौती और पर्याप्त विश्राम देने की बात कही गई है। विद्युत बोर्डों ने भी आगाह किया है कि एयर कंडीशनिंग और कूलिंग उपकरणों की बढ़ती मांग के कारण ग्रिड पर भारी दबाव है, जिससे पीक ऑवर्स में बिजली संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जनता से अपील की है कि वे इस भीषण गर्मी के दौरान खुद को हाइड्रेटेड रखें। निर्जलीकरण और हीट स्ट्रोक के मामलों में अचानक हुई वृद्धि ने चिंता बढ़ा दी है। डॉक्टरों का सुझाव है कि अधिक उमस वाले क्षेत्रों में पसीना जल्दी नहीं सूखता, जिससे शरीर का आंतरिक तापमान बढ़ सकता है। ऐसे में सूती और ढीले कपड़ों का चुनाव करना और अनावश्यक यात्राओं से बचना ही बचाव का एकमात्र रास्ता है।
दक्षिण भारत के मौसम में आया यह परिवर्तन जलवायु परिवर्तन की उस वैश्विक तस्वीर का हिस्सा है, जहां मौसमी चक्र अनिश्चित होता जा रहा है। आने वाले हफ्तों में यदि बारिश की सक्रियता नहीं बढ़ी, तो दक्षिण भारतीय राज्यों को एक अभूतपूर्व गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, चिलचिलाती धूप और उमस भरे वातावरण ने पूरे क्षेत्र को अपनी गिरफ्त में ले लिया है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
