दक्षिण भारत का मौसम: केरल और कर्नाटक में बारिश के आसार, उमस के बीच पारे में उतार-चढ़ाव
केरल और कर्नाटक के कई हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना, जबकि तटीय इलाकों में 36 डिग्री तापमान के साथ भारी उमस का दौर जारी।

दक्षिण भारत के एक शहर में बारिश के दौरान छाता लेकर सड़क पार करते लोग, जो क्षेत्र में प्री-मानसून गतिविधियों को दर्शाता है।
भारत के भौगोलिक परिदृश्य में इस समय मौसम के दो चरम रूप देखने को मिल रहे हैं। जहाँ उत्तर भारत भीषण लू और शुष्क गर्मी की चपेट में है, वहीं दक्षिण भारत के राज्यों में मौसम का मिजाज पूरी तरह से अलग और उतार-चढ़ाव भरा बना हुआ है। प्रायद्वीपीय भारत के तटीय और आंतरिक क्षेत्रों में वर्तमान में गर्मी और नमी का एक ऐसा अनूठा मिश्रण देखने को मिल रहा है, जिसने जनजीवन को एक अलग प्रकार की चुनौती में डाल दिया है। केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के कई हिस्सों में बादलों की आवाजाही और हल्की बूंदाबांदी ने गर्मी से आंशिक राहत तो दी है, लेकिन हवा में मौजूद भारी उमस ने बेचैनी बढ़ा दी है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में तापमान वर्तमान में 30 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। हालांकि यह तापमान उत्तर भारत के मुकाबले कम प्रतीत होता है, लेकिन तटीय क्षेत्रों में आर्द्रता यानी ह्यूमिडिटी का स्तर 70 से 80 प्रतिशत तक पहुँचने के कारण 'फील लाइक' तापमान (महसूस होने वाली गर्मी) वास्तविक तापमान से कहीं अधिक है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र की ओर से आने वाली नम हवाएं और स्थानीय वायुमंडलीय दबाव में बदलाव के कारण दक्षिण के राज्यों में मौसम की यह लुका-छिपी जारी है।
केरल और कर्नाटक के दक्षिणी आंतरिक हिस्सों में पिछले कुछ घंटों के दौरान बादलों के घने जमावड़े के साथ हल्की बारिश दर्ज की गई है। इस प्री-मानसून गतिविधि ने बागवानी फसलों, विशेषकर कॉफी और मसालों की खेती करने वाले किसानों के लिए मिश्रित संकेत दिए हैं। वहीं, तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई सहित अन्य तटीय इलाकों में आसमान मुख्यतः साफ है, लेकिन समुद्री हवाओं के कारण चिपचिपी गर्मी का दौर जारी है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दो से तीन दिनों में कर्नाटक के कुछ जिलों और केरल के पहाड़ी क्षेत्रों में गरज के साथ हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने की संभावना प्रबल है।
आधिकारिक स्तर पर, स्थानीय प्रशासन ने तटीय जिलों के निवासियों को उमस भरी गर्मी से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं, जैसे डिहाइड्रेशन और त्वचा संबंधी रोगों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेष रूप से मछुआरों और तटीय क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के लिए मौसम के इस बदलाव पर नजर रखना अनिवार्य कर दिया गया है। क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्रों को सक्रिय कर दिया गया है ताकि किसी भी अचानक होने वाले मौसमी परिवर्तन या भारी बारिश की स्थिति में समय रहते सूचना प्रसारित की जा सके।
दक्षिण भारत में मौसम का यह दोहरा व्यवहार—एक तरफ उमस भरी गर्मी और दूसरी तरफ हल्की बारिश—देश के विविध मौसम तंत्र को दर्शाता है। जहाँ उत्तर और मध्य भारत शुष्क तपन से जूझ रहे हैं, वहीं दक्षिण भारत में बारिश की बूंदों ने प्रकृति को कुछ हद तक ठंडा रखने का प्रयास किया है। हालांकि, यह केवल एक शुरुआत है और आने वाले हफ्तों में मानसून पूर्व की ये गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। यह स्थिति न केवल कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के दौर में बदलते मौसमी चक्र को समझने के लिए भी एक अहम संकेतक है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
