पसीने से तर-बतर दक्षिण भारत: क्या समुद्री हवाएं दिला पाएंगी इस चिपचिपी उमस से राहत?
चेन्नई और हैदराबाद सहित दक्षिण के राज्यों में बढ़ी चिपचिपी गर्मी, तटीय इलाकों में समुद्री हवाओं के कारण आंशिक बादल और राहत की संभावना।

दक्षिण भारत में सूर्यास्त के समय नारियल के पेड़ों के पीछे नारंगी आसमान। समुद्री हवाओं से उमस भरी गर्मी में राहत की उम्मीद है।
दक्षिण भारत के विशाल प्रायद्वीपीय क्षेत्र में इन दिनों मौसम का मिजाज मिला-जुला लेकिन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों में रहने वाले करोड़ों लोग इस समय झुलसाने वाली गर्मी और शरीर को निचोड़ देने वाली उमस का सामना कर रहे हैं। अप्रैल के मध्य में सूर्य की सीधी किरणों ने तापमान को 32 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंचा दिया है। हालांकि यह तापमान उत्तर भारत की तुलना में कम प्रतीत हो सकता है, लेकिन हवा में मौजूद अत्यधिक नमी यानी ह्यूमिडिटी ने वास्तविक अनुभव होने वाली गर्मी (Feel Like Temperature) को काफी बढ़ा दिया है, जिससे जनजीवन पसीने से तर-बतर नजर आ रहा है।
चेन्नई जैसे तटीय शहरों में समुद्री हवाओं की भूमिका इस समय अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से आने वाली आर्द्र हवाएं तटीय इलाकों में तापमान को बहुत अधिक बढ़ने से तो रोक रही हैं, लेकिन यही हवाएं चिपचिपी उमस का मुख्य कारण भी बन रही हैं। तटीय क्षेत्रों में सुबह के समय आर्द्रता का स्तर 70 से 80 प्रतिशत तक पहुंच रहा है, जिसके कारण पंखे और कूलर भी बेअसर साबित हो रहे हैं। शाम के समय चलने वाली समुद्री समीर (Sea Breeze) स्थानीय निवासियों के लिए एकमात्र राहत का स्रोत बनी हुई है, जो शाम ढलते ही पारा कुछ डिग्री नीचे गिरा देती है।
वहीं दूसरी ओर, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे आंतरिक पठारी शहरों में मौसम का मिजाज थोड़ा अलग है। बेंगलुरु, जिसे कभी अपनी सुखद जलवायु के लिए जाना जाता था, वहां भी अब दोपहर के समय पारा 35 डिग्री सेल्सियस को पार कर रहा है। हैदराबाद में स्थिति और भी गंभीर है जहां शुष्क हवाओं और कंक्रीट के शहरी विस्तार के कारण तापमान 39 डिग्री के करीब बना हुआ है। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों ने राहत की एक धुंधली किरण भी दिखाई है। आगामी 24 से 48 घंटों में दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और छिटपुट बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। यह मौसमी बदलाव स्थानीय निम्न दबाव क्षेत्र (Trough) के कारण हो सकता है, जिससे अस्थायी तौर पर तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है।
प्रशासनिक स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य विभागों ने एडवाइजरी जारी कर लोगों को निर्जलीकरण (Dehydration) के प्रति सतर्क किया है। उमस भरे मौसम में शरीर से पसीना अधिक निकलने के कारण इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का खतरा बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त, कृषि वैज्ञानिकों ने भी इस बढ़ती गर्मी को देखते हुए दक्षिण भारत के किसानों को सिंचाई प्रबंधन के विशेष निर्देश दिए हैं। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ जिलों में बढ़ती गर्मी का असर फसलों की पैदावार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, दक्षिण भारत की जनता की नजरें आसमान की ओर टिकी हैं, जहां बादलों की आवाजाही और समुद्री हवाओं का रुख ही उनकी दिनचर्या को तय कर रहा है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
