दक्षिण भारत में मौसम का ये कैसा उलटफेर?कहीं 42°C की तपिश, कहीं तूफानी बारिश|
आंध्र और तेलंगाना में पारा 42 डिग्री के पार पहुंचा, जबकि केरल और कर्नाटक में प्री-मानसून गतिविधियों से भारी बारिश और तूफान की चेतावनी।

दक्षिण भारत में प्री-मानसून बारिश के दौरान सड़क पार करतीं दो छात्राएं|
दक्षिण भारत के प्रायद्वीपीय क्षेत्र में प्रकृति के दो चरम रूप एक साथ देखने को मिल रहे हैं, जिसने पूरे क्षेत्र के जनजीवन को एक अजीबोगरीब चुनौती में डाल दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, जहां आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के आंतरिक हिस्से भीषण लू की चपेट में हैं, वहीं केरल और कर्नाटक के कई जिलों में प्री-मानसून गतिविधियों ने दस्तक दे दी है। यह विरोधाभासी स्थिति दक्षिण भारत के भौगोलिक परिवेश और वायुमंडलीय दबाव में आए अचानक बदलाव का परिणाम है, जिससे एक तरफ पारा 42 डिग्री सेल्सियस को पार कर रहा है, तो दूसरी तरफ गरज-चमक के साथ हो रही बारिश ने राहत के साथ-साथ चिंता भी बढ़ा दी है।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई जिलों में गर्मी का आलम यह है कि प्रशासन को 'येलो' और 'ऑरेंज' अलर्ट जारी करने पड़े हैं। चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के कारण दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि शुष्क हवाओं के निरंतर प्रवाह ने इन राज्यों में नमी को न्यूनतम स्तर पर धकेल दिया है, जिससे तापमान सामान्य से 3-5 डिग्री अधिक दर्ज किया जा रहा है। इसके विपरीत, कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों और केरल के पहाड़ी जिलों में मानसून के आने से पहले की बारिश यानी प्री-मानसून शावर का सिलसिला शुरू हो गया है। यहां बादल फटने जैसी स्थिति और तेज हवाओं के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
कानूनी और सुरक्षा मानकों के तहत, स्थानीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों ने तटीय क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है। तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए केरल सरकार ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने लू से बचने के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए नागरिकों से दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच घर से बाहर न निकलने की अपील की है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्री-मानसून की यह तीव्रता पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है, जो जलवायु परिवर्तन के गहरे संकेतों की ओर इशारा करती है।
इस मौसमी उथल-पुथल का सबसे बड़ा प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। तेलंगाना में धान की खड़ी फसल को गर्मी से नुकसान हो रहा है, तो केरल में अचानक हुई बारिश ने रबर और मसालों की खेती के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। दक्षिण भारत के इस बदलते मिजाज ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिन जलवायु अनुकूलन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होने वाले हैं। नागरिकों को अब एक तरफ चिलचिलाती धूप से खुद को बचाना है, तो दूसरी तरफ अचानक आने वाले चक्रवाती तूफानों और भारी बारिश के प्रति सतर्क रहना है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
