अजब मौसम का गजब खेल! मैदानी इलाकों में छूटे पसीने, तो पहाड़ों पर बरसीं राहत की बूंदें
मैदानी इलाकों में सूरज के तीखे तेवर और लू का प्रकोप जारी है, जबकि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में तेज आंधी-पानी की संभावना है।

(बाएं) भीषण धूप के बीच मुंह ढककर दुपहिया वाहन से जाते लोग और (दाएं) पहाड़ी पर्यटन स्थल पर छतरी लेकर घूमते सैलानी।
उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में इन दिनों प्रकृति के दो बिल्कुल विपरीत रूप देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां मैदानी इलाके सूरज की तपिश और जानलेवा लू की चपेट में हैं, वहीं दूसरी तरफ पहाड़ी राज्यों में मानसूनी हलचल और पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम सुहाने रुख की ओर बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर भारत के मैदानी भागों में फिलहाल शुष्क मौसम और प्रचंड गर्मी का प्रकोप बना रहेगा, जबकि ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है। मौसम का यह दोहरा मिजाज एक ही समय में दो अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर रहा है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पंजाब और हरियाणा के कुछ चुनिंदा सीमावर्ती हिस्सों में हवा के कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण आंशिक बादल छा सकते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर धूल भरी आंधी और हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो यह मैदानी क्षेत्रों के निवासियों के लिए इस भीषण गर्मी के बीच एक बड़ी और तात्कालिक राहत साबित हो सकती है। हालांकि, विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह मौसमी बदलाव बहुत सीमित समय के लिए होगा और मैदानी राज्यों के मुख्य शहरों में दिन का तापमान सामान्य से काफी ऊपर बना रहेगा, जिससे हीटवेव की स्थिति से पूरी तरह मुक्ति नहीं मिलने वाली है।
इसके विपरीत, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों में मौसम का बिल्कुल अलग नजारा देखने को मिल रहा है। इन पहाड़ी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते घने काले बादलों का डेरा जमा हुआ है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से ओलावृष्टि, तेज आंधी और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। पहाड़ों में अचानक होने वाली इस वर्षा के कारण नदियों के जलस्तर में वृद्धि हो सकती है, जिससे घाटी वाले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। पहाड़ों में हो रही इस लगातार बारिश और बर्फीली हवाओं के कारण वहां के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जो मैदानी इलाकों की झुलसाने वाली गर्मी के बिल्कुल विपरीत है।
प्रशासनिक और स्वास्थ्य स्तर पर इस दोहरे मौसम को देखते हुए संबंधित राज्य सरकारों ने अपनी एडवायजरी जारी की है। मैदानी इलाकों के प्रशासन ने दोपहर के समय लोगों को घरों के अंदर रहने और अत्यधिक तरल पदार्थों का सेवन करने का परामर्श दिया है, ताकि वे हीट स्ट्रोक की चपेट में आने से बच सकें। दूसरी ओर, पहाड़ी राज्यों के आपदा प्रबंधन विभागों ने स्थानीय निवासियों और वहां पहुंच रहे पर्यटकों को अत्यधिक ऊंचाई वाले संवेदनशील क्षेत्रों तथा भूस्खलन संभावित मार्गों पर यात्रा न करने की हिदायत दी है। मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर भारत में प्रकृति का यह दोहरा संतुलन अगले कुछ दिनों तक इसी प्रकार बना रहेगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
