उत्तर भारत में मौसम का दोहरा वार: पहाड़ों पर बर्फबारी की सफेद चादर, मैदानों में लू का प्रचंड प्रहार
पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पर्वतीय क्षेत्रों में हिमपात हुआ है, जबकि दिल्ली-एनसीआर समेत मैदानी राज्यों में तापमान बढ़ने से गर्मी का प्रकोप तेज हो गया है।

उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई ताजा बर्फबारी के बाद सफेद चादर से ढकी सड़कें और यातायात की स्थिति।
नई दिल्ली | 5 अप्रैल, 2026
उत्तर भारत के आसमान में इन दिनों प्रकृति के दो विपरीत रूप एक साथ देखने को मिल रहे हैं। जहाँ एक ओर पहाड़ों पर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के चलते मौसम ने सर्द करवट ली है, वहीं दूसरी ओर मैदानी इलाकों में सूरज के तीखे तेवर और गर्म हवाओं ने जनजीवन को बेहाल करना शुरू कर दिया है। उत्तर भारत के राज्यों में मौसम का यह विचित्र मिजाज न केवल आम नागरिकों की दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है, बल्कि कृषि और पर्यटन क्षेत्र पर भी इसके गहरे निशान दिखाई दे रहे हैं।
हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई हिस्सों में पिछले 24 घंटों के दौरान हुई बर्फबारी ने अप्रैल के महीने में भी शीतकालीन अहसास करा दिया है। गुलमर्ग और सोनमर्ग जैसी पर्यटन स्थलों पर बिछी बर्फ की सफेद चादर सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन के लिए यह चुनौतियां लेकर आई है। कई पहाड़ी संपर्क मार्ग बर्फबारी और भूस्खलन की आशंका के चलते बंद कर दिए गए हैं, जिससे परिवहन व्यवस्था बाधित हुई है।
इसके उलट, मैदानी राज्यों—विशेषकर राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली-एनसीआर—में गर्मी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों में पारा 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ सकता है। शुष्क पश्चिमी हवाओं के कारण दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगा है और लोग लू (Heatwave) के थपेड़ों से बचने के जतन कर रहे हैं। हालांकि, कुछ इलाकों में छिटपुट बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना जताई गई है, जो क्षणिक राहत तो दे सकते हैं, लेकिन उमस में इजाफा होने का डर भी बना हुआ है।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु में आ रहे ये तीव्र बदलाव कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय हैं। उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में हुई ओलावृष्टि ने गेहूं और सरसों की तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है, जिससे किसान आर्थिक संकट की ओर देख रहे हैं। सरकारी आंकड़ों और आधिकारिक सूचनाओं के अनुसार, संबंधित राज्य सरकारों ने जिलाधिकारियों को फसल नुकसान का आकलन करने और रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं ताकि समय रहते राहत कार्य शुरू किए जा सकें।
उत्तर भारत में मौसम का यह दोहरा प्रहार आने वाले सप्ताह में भी जारी रहने की संभावना है। प्रशासन ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य संबंधी एडवाइजरी जारी की है, जिसमें लोगों को हाइड्रेटेड रहने और दोपहर के समय सीधे धूप से बचने की सलाह दी गई है। प्रकृति का यह संतुलन और असंतुलन हमें एक बार फिर जलवायु परिवर्तन के उन गंभीर खतरों की याद दिलाता है, जिनका सामना वर्तमान में पूरी दुनिया कर रही है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
