उत्तर भारत में मौसम का दोहरा वार-यूपी-राजस्थान में 'लू' का टॉर्चर, तो हिमालय की गोद में झमाझम बारिश का अलर्ट|
मैदानी राज्यों में बढ़ते पारे के बीच भीषण लू का संकट, वहीं पश्चिमी विक्षोभ से पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम बदलने के आसार।

एक ओर भीषण गर्मी से बचने के लिए कपड़े का सहारा लेते लोग और दूसरी ओर बारिश में साइकिल चलाता व्यक्ति|
नई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर भारत का भूगोल इस समय मौसम के दो विरोधाभासी मिजाजों का केंद्र बना हुआ है। जहां एक ओर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य भारत के विशाल मैदानी भूभाग सूरज की तपिश और भीषण हीटवेव की चपेट में हैं, वहीं दूसरी ओर हिमालयी बेल्ट के राज्यों में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते आंधी और बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है। मौसम का यह दोहरा व्यवहार न केवल कृषि चक्र को प्रभावित कर रहा है, बल्कि आम जनजीवन के लिए स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी खड़ी कर रहा है।
राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों और उत्तर प्रदेश के मैदानी जनपदों में पारा लगातार रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, शुष्क पछुआ हवाओं के कारण हीटवेव (लू) की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जिससे दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है। प्रशासन ने लोगों को दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच घर से बाहर न निकलने और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करने की स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है। हीटवेव के कारण पशुधन और फसलों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं।
दूसरी तरफ, भौगोलिक विषमता का एक अलग नजारा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में देखने को मिल रहा है। इन पहाड़ी राज्यों में बादलों की आवाजाही के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं का अनुमान लगाया गया है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी दी गई है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। हालांकि, यह बारिश पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और पर्यटन गतिविधियों के लिए बाधा भी बन सकती है। स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों को ढलान वाले क्षेत्रों और नदी किनारों से दूर रहने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
मौसम विभाग का कहना है कि आगामी 48 घंटों तक यह विरोधाभास बना रहेगा। हीटवेव प्रभावित क्षेत्रों में फिलहाल किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है, जबकि पहाड़ी इलाकों में प्री-मानसून गतिविधियों के चलते धूल भरी आंधी चलने की भी आशंका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस बदलते मौसम में विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के प्रति अतिरिक्त सावधानी बरतने का आह्वान किया है। उत्तर भारत के इस मौसमी संक्रमण काल में सुरक्षा और सतर्कता ही एकमात्र बचाव है, क्योंकि एक तरफ लू का खतरा है तो दूसरी तरफ अचानक आने वाले तूफान की चेतावनी।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
