उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में कुदरत के दो अलग-अलग रंग एक साथ देखने को मिल रहे हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्सों में धूल भरी आंधी और हल्की बारिश की स्थिति बनी हुई है, जबकि उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप बदस्तूर जारी है। मौसम के इस अनपेक्षित उलटफेर ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है, जहां एक ओर तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर आंधी-तूफान के कारण फसलों और संपत्ति को नुकसान पहुंचने की खबरें भी सामने आ रही हैं।

राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में तेज रफ्तार से चली धूल भरी हवाओं ने दृश्यता को काफी कम कर दिया, जिससे सड़क यातायात पर बुरा असर पड़ा। जयपुर और बीकानेर संभाग में आंधी के बाद हुई छिटपुट वर्षा से तापमान में चार से पांच डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है, जिससे स्थानीय निवासियों को झुलसाती गर्मी से अस्थायी राहत मिली है। इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और झांसी जैसे जिलों में पारा अभी भी 45 डिग्री के पार बना हुआ है, जिससे जनजीवन त्रस्त है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह विरोधाभासी स्थिति उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भारत के ऊपर बनने वाले वायुमंडलीय दबाव में भिन्नता के कारण उत्पन्न हुई है।

कृषि विशेषज्ञों ने इस बदलते मौसम को लेकर किसानों के लिए चिंता व्यक्त की है। विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा में, जहां गेहूं की कटाई के बाद मंडियों में रखे अनाज को भीगने से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम करने की सलाह दी गई है। तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ उखड़ने और बिजली के पोल गिरने की घटनाएं भी रिपोर्ट की गई हैं, जिसके चलते विद्युत आपूर्ति बाधित हुई है। स्थानीय प्रशासन ने आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा है और नागरिकों से अपील की है कि वे आंधी-तूफान के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या जर्जर इमारतों के नीचे शरण न लें।

विधिक और आधिकारिक दृष्टिकोण से देखें तो आपदा राहत विभाग ने उन प्रभावित जिलों के लिए मुआवजा आकलन की प्रक्रिया शुरू करने के संकेत दिए हैं जहां आंधी और ओलावृष्टि से फसलों को क्षति पहुंची है। स्वास्थ्य विभाग ने हीटवेव प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है, जिसमें दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त जल सेवन करने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले तीन से चार दिनों तक मौसम का यह अस्थिर रुख बना रहेगा, जिसके बाद ही उत्तर भारत के संपूर्ण क्षेत्र में तापमान में एकसमान स्थिरता आने की संभावना है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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