संकट में उत्तर भारत-धूल के गुबार में गुम हुईं सड़कें, एक तरफ झुलसाती लू और दूसरी तरफ चक्रवाती आंधी का कोहराम|
दिल्ली, यूपी, बिहार और राजस्थान सहित कई राज्यों में 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने, बिजली कड़कने और बारिश के साथ लू का प्रकोप रहने का अनुमान।

तटीय और मैदानी क्षेत्रों में तीव्र चक्रवाती आंधी के कारण सड़क किनारे लगे नारियल और ताड़ के ऊंचे पेड़ तेज हवाओं से एक तरफ झुकते हुए।
भारतीय उपमहाद्वीप के एक बड़े हिस्से विशेषकर उत्तर और मध्य भारत में वायुमंडलीय परिसंचरण में आए अचानक और तीव्र बदलावों के कारण मौसम का एक अभूतपूर्व और अत्यंत जटिल रूप देखने को मिल रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने संपूर्ण उत्तर भारत के मैदानी और पहाड़ी इलाकों के लिए एक अत्यंत गंभीर और दोहरी मौसमी चेतावनी जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर भारत के मैदानी राज्य एक तरफ जहां भीषण लू यानी हीटवेव के चरम प्रकोप से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ तीव्र पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय चक्रवाती प्रणालियों के सक्रिय होने से मैदानी इलाकों में 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी आंधी-तूफान, आकाशीय बिजली चमकने और अचानक तेज बारिश होने का दोहरा संकट खड़ा हो गया है। इस विषम मौसमी दशा के कारण दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड समेत करीब आधा दर्जन से अधिक राज्यों में प्रशासनिक अमले को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस मौसमी उथल-पुथल के पीछे एक मुख्य भौगोलिक कारण पाकिस्तान और उसके आसपास के क्षेत्रों से आने वाली ठंडी पश्चिमी हवाओं और मध्य भारत से उठने वाली अत्यधिक गर्म व शुष्क पछुआ हवाओं का आपस में टकराना है। हवाओं के इस आपसी टकराव के कारण मैदानी राज्यों के वायुमंडल में भारी अस्थिरता पैदा हो गई है। इसी अस्थिरता के परिणामस्वरूप राजस्थान के थार मरुस्थल से उठी तीव्र धूलभरी आंधी उत्तर प्रदेश, पंजाब और दिल्ली की तरफ तेजी से अग्रसर हो रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि जब यह आंधी चरम पर होगी तब हवा की गति 70 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जो कमजोर ढांचों, पेड़ों और बिजली के खंभों को उखाड़ने के लिए पर्याप्त है। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि होने की भी गंभीर आशंका जताई गई है, जिससे फसलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
इस दोहरे मौसमी हमले का दूसरा सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आंधी और बारिश के अलर्ट के बावजूद कई मैदानी इलाकों में दिन के समय लू का प्रकोप निरंतर जारी रहेगा। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में तापमान सामान्य से पांच डिग्री अधिक दर्ज किया जा रहा है, जिससे वहां के निवासियों को दिन में भीषण उमस और लू के थपेड़ों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि शाम होते ही आसमान में धूलभरी आंधी और बादलों की गर्जना शुरू हो जाती है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि यह मौसमी चक्र अत्यंत अनपेक्षित है क्योंकि आम तौर पर बारिश होने के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की जाती है, परंतु वायुमंडल की ऊपरी परतों में नमी की कमी के कारण जमीन की तपन वैसी ही बनी हुई है, जिससे रातें भी अत्यधिक गर्म रिकॉर्ड की जा रही हैं।
आधिकारिक और कानूनी सुरक्षा के मोर्चे पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने सभी संबंधित राज्य सरकारों और जिलाधिकारियों को आपदा प्रबंधन नियमों के तहत विशेष सतर्कता बरतने के कड़े आदेश पारित किए हैं। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण और राज्य बिजली बोर्डों को आंधी-तूफान के दौरान ग्रिड सुरक्षा बनाए रखने तथा तारों के टूटने से होने वाले हादसों को रोकने के लिए एहतियातन बिजली कटौती करने के अधिकार दिए गए हैं। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और रेलवे ने भी खराब दृश्यता और तेज हवाओं की आशंका को देखते हुए उत्तर भारत की उड़ानों और रेलगाड़ियों के परिचालन पर निरंतर निगरानी रखने का फैसला किया है। यातायात पुलिस ने भी धूलभरी आंधी के दौरान दृश्यता बेहद कम होने की स्थिति में वाहन चालकों को सुरक्षित स्थानों पर गाड़ियां रोकने की हिदायत दी है।
मौसम के इस विकराल और अशांत रूप ने एक बार फिर ग्लोबल वार्मिंग और स्थानीय पर्यावरण में आ रहे गंभीर असंतुलन की तरफ ध्यान आकर्षित किया है। उत्तर भारत के इन राज्यों में जहां कृषि कार्य और सामान्य जनजीवन पहले से ही भीषण गर्मी के कारण धीमा पड़ गया था, वहीं अब 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली ये हवाएं और आकाशीय बिजली की घटनाएं जान-माल के नुकसान के खतरे को कई गुना बढ़ा रही हैं। मौसम विभाग की अंतिम रिपोर्ट के अनुसार जब तक यह पश्चिमी विक्षोभ पूरी तरह से कमजोर होकर आगे नहीं बढ़ जाता, तब तक समूचे उत्तर भारत को लू के थपेड़ों और अचानक आने वाले इस आंधी-तूफान के दोहरे प्रहार से स्थायी राहत मिलने की कोई संभावना नहीं दिखाई देती है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
