नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में एक बार फिर प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने लगा है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) "खराब" श्रेणी में पहुंच गया है। दिल्ली के कई इलाकों में शनिवार और रविवार को AQI 150 से 176 के बीच दर्ज किया गया। हवा की गुणवत्ता में इस गिरावट ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है।

प्रदूषण के मामले में दिल्ली का क्या है हाल?

दिल्ली में हवा की रफ्तार कम होने और स्थानीय कारकों की वजह से प्रदूषक तत्व (Pollutants) वातावरण में जमा हो रहे हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली का औसत AQI फिलहाल 'खराब' श्रेणी में बना हुआ है। शहर के कुछ हॉटस्पॉट जैसे आनंद विहार, जहांगीरपुरी और ओखला में प्रदूषण का स्तर 200 के करीब भी देखा गया है।

देश के अन्य प्रदूषित शहर: बिहार और यूपी सबसे आगे

हैरानी की बात यह है कि प्रदूषण के मामले में दिल्ली ही नहीं, बल्कि बिहार और उत्तर प्रदेश के कई छोटे शहर भी डरा रहे हैं। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक:

  • बिहार: सहरसा (AQI 449), बेगूसराय और मुंगेर जैसे शहरों में हवा की स्थिति बेहद गंभीर है।
  • उत्तर प्रदेश: बहराइच और फैजाबाद जैसे इलाकों में भी AQI 340 के पार दर्ज किया गया है, जो 'बेहद खराब' की श्रेणी में आता है।
  • महाराष्ट्र: जलगांव जैसे शहरों में भी औद्योगिक गतिविधियों के कारण हवा का स्तर गिर रहा है।

AQI की श्रेणियों को समझें

आम आदमी के लिए यह जानना जरूरी है कि हवा का स्तर कब खतरनाक हो जाता है:

  • 0-50: अच्छा (Good)
  • 51-100: संतोषजनक (Satisfactory)
  • 101-200: मध्यम (Moderate)
  • 201-300: खराब (Poor)
  • 301-400: बहुत खराब (Very Poor)
  • 401-500: गंभीर (Severe)

किसे है सबसे ज्यादा खतरा?

जब AQI 150 के पार जाता है, तो हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM 2.5) फेफड़ों के जरिए सीधे खून में पहुंच सकते हैं। इससे सबसे ज्यादा खतरा इन समूहों को है:

  • सांस के मरीज: जिन्हें अस्थमा या ब्रोंकाइटिस की शिकायत है, उन्हें सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।
  • बच्चे: उनके फेफड़े विकसित हो रहे होते हैं, इसलिए प्रदूषित हवा उन पर बुरा असर डालती है।
  • बुजुर्ग: दिल की बीमारी और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले बुजुर्गों के लिए यह हवा घातक हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह

डॉक्टरों ने सलाह दी है कि जब तक हवा में सुधार न हो, तब तक कुछ सावधानियां जरूर बरतें:

  • सुबह और शाम के समय 'आउटडोर एक्टिविटी' या सैर करने से बचें।
  • घर से बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाला N95 मास्क जरूर पहनें।
  • सांस फूलने या आंखों में जलन होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • घर के अंदर हवा को शुद्ध रखने के लिए एयर प्यूरीफायर का उपयोग किया जा सकता है।

प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं और मौसम में हो रहे बदलावों की वजह से धूल के कण जमीन के करीब रह जाते हैं। इसके अलावा, औद्योगिक कचरे को जलाना भी छोटे शहरों में प्रदूषण का बड़ा कारण बन रहा है।

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए केवल सरकार के भरोसे बैठना पर्याप्त नहीं है। हमें निजी तौर पर भी सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करके और कूड़ा न जलाकर अपना योगदान देना होगा। सुरक्षित रहें और अपनी सेहत का ध्यान रखें।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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