पहाड़ों पर कुदरत का श्वेत तांडव: पश्चिमी विक्षोभ ने थामी उत्तर भारत की रफ्तार
हिमालयी क्षेत्रों में सक्रिय शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ ने कश्मीर से उत्तराखंड तक भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश का दौर शुरू कर दिया है। 28 जनवरी 2026 को उत्तर भारत में शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है। जानिए मौसम का पूरा हाल, बंद रास्ते और आगामी दिनों का पूर्वानुमान।

नई दिल्ली/शिमला: उत्तर भारत इस समय प्रकृति के दोहरे प्रहार का सामना कर रहा है। हिमालयी क्षेत्रों में सक्रिय एक शक्तिशाली 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) ने जहां ऊंचाइयों पर बर्फ की मोटी चादर बिछा दी है, वहीं मैदानी इलाकों में बारिश और शीतलहर ने जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि अगले 24 घंटों तक पहाड़ों पर बर्फबारी का यह दौर जारी रहेगा, जिससे आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है।
हिमालय में हिमपात और मैदानों में बारिश का तांडव
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, एक तीव्र पश्चिमी विक्षोभ वर्तमान में उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर से गुजर रहा है। इसके प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम और कहीं-कहीं भारी बर्फबारी हो रही है।
- पहाड़ों का हाल: जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग और हिमाचल के लाहौल-स्पीति में भारी बर्फबारी के कारण कई प्रमुख मार्ग बंद हो गए हैं। उत्तराखंड के केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम भी बर्फ की सफेद चादर से ढके हुए हैं।
- मैदानी इलाकों पर असर: पहाड़ों पर हो रही इस हलचल का सीधा असर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-NCR में देखने को मिल रहा है। इन राज्यों में सुबह से ही घने बादल छाए हुए हैं और कई स्थानों पर गरज के साथ हल्की बौछारें पड़ने से ठिठुरन बढ़ गई है।
सुरक्षा अलर्ट और आधिकारिक निर्देश
प्रशासन ने पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए 'कठोर सुरक्षा चेतावनी' जारी की है। उत्तराखंड के कुछ इलाकों में आज ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी संभावना जताई गई है।
- फिसलन भरी सड़कें: बर्फबारी के कारण सड़कों पर फिसलन बढ़ गई है, जिससे वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा है।
- यातायात बाधित: भारी बर्फ के कारण हिमाचल प्रदेश में 700 से अधिक सड़कें और कई राष्ट्रीय राजमार्ग अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं।
- विद्युत आपूर्ति: बर्फबारी के चलते ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर प्रभावित हुए हैं, जिससे कई गांवों में ब्लैकआउट जैसी स्थिति बनी हुई है।
आगे क्या?
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि 28 जनवरी की रात से इस विक्षोभ का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगेगा। हालांकि, इसके जाते ही पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाएं मैदानी इलाकों में 'गलन' और बढ़ा देंगी। आने वाले दो-तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में $3^{-circ}-text{C}$ से $5^{-circ}-text{C}$ तक की गिरावट आने की प्रबल संभावना है, जो फरवरी की शुरुआत तक कड़ाके की ठंड का संकेत दे रही है।

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