नई दिल्ली | 30 जनवरी, 2026: क्या प्रकृति एक बार फिर उत्तर भारत की रफ्तार पर लगाम लगाने वाली है? जनवरी का अंत होते-होते मौसम ने एक ऐसा मोड़ ले लिया है जिसने आम जनजीवन से लेकर शासन-प्रशासन तक की चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, आज यानी 30 जनवरी को समूचा उत्तर भारत कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चादर में लिपटा हुआ है, जबकि हिमालयी क्षेत्रों में एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) दस्तक देने को तैयार है।

कोहरे और शीतलहर का डबल अटैक

शुक्रवार की सुबह दिल्ली-NCR, पंजाब और हरियाणा के लिए 'ठिठुरन भरी' रही। राजधानी दिल्ली में सुबह का तापमान गिरकर 9°C तक पहुँच गया, जिससे गलन बढ़ गई है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि:

  • दिल्ली और हरियाणा: यहाँ के कई जिलों में आज 'शीतलहर' (Cold Wave) का प्रकोप बना रहेगा।
  • पंजाब और उत्तर प्रदेश: मनसा, बठिंडा और प्रयागराज जैसे शहरों में सुबह के समय 10 से 15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली बर्फीली हवाओं ने कनकनी बढ़ा दी है।
  • घना कोहरा: दृश्यता (Visibility) कम होने के कारण रेल और सड़क यातायात पर बुरा असर पड़ा है।

अगले 48 घंटों का 'रेन अलर्ट': क्या बारिश बिगाड़ेगी खेल?

भले ही आज दिल्ली में दोपहर बाद धूप खिलने की संभावना है, लेकिन यह राहत क्षणिक हो सकती है। IMD की रिपोर्ट के अनुसार, आज रात से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करना शुरू करेगा। इसके परिणामस्वरूप:

  • 31 जनवरी से 1 फरवरी: पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में गरज के साथ छींटे पड़ने और 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की प्रबल संभावना है।
  • राजस्थान का हाल: मरुधरा में 31 जनवरी से मौसम पलटेगा और पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में बिजली कड़कने के साथ हल्की बारिश हो सकती है।
  • पहाड़ों पर बर्फबारी: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में भारी हिमपात की चेतावनी जारी की गई है, जिसका सीधा असर मैदानी इलाकों के तापमान पर पड़ेगा।

आधिकारिक निर्देश और कानूनी पक्ष

प्रशासन ने बढ़ती ठंड और संभावित बारिश को देखते हुए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। कृषि विभाग ने पंजाब और हरियाणा के किसानों को सलाह दी है कि वे आने वाली ओलावृष्टि की संभावना को देखते हुए फसलों का विशेष ध्यान रखें। यातायात विभाग ने धुंध के कारण वाहन चालकों को 'फॉग लाइट' का प्रयोग करने और गति सीमा नियंत्रित रखने के कड़े निर्देश दिए हैं।

कुदरत के बदलते तेवर

जनवरी के इन अंतिम दिनों में मौसम का यह मिजाज केवल एक बदलाव नहीं, बल्कि पर्यावरण में हो रहे व्यापक उतार-चढ़ाव का संकेत है। जहाँ यह बारिश प्रदूषण से कुछ राहत दिला सकती है, वहीं शीतलहर का दोबारा लौटना कमजोर वर्ग और बेघर लोगों के लिए कड़ी परीक्षा साबित होगा। आने वाला वीकेंड उत्तर भारतीयों के लिए न केवल गीला बल्कि और भी ठंडा होने वाला है।

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