फरवरी में 'मई' जैसी तपिश? उत्तर भारत के मैदानों में कोहरे की चादर और समय से पहले बढ़ता पारा!
उत्तर भारत मौसम अपडेट 12 फरवरी 2026: मैदानी इलाकों में शुष्क मौसम और बढ़ते तापमान के बीच सुबह घना कोहरा छाया रहा। यूपी, पंजाब और दिल्ली में दृश्यता प्रभावित। जानें अगले 5 दिनों का पूर्वानुमान।

आज उत्तर भारत के मौसम में एक अजीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है। जहाँ एक ओर सुबह की शुरुआत घने कोहरे और धुंध के साथ हो रही है, वहीं दूसरी ओर सूरज चढ़ते ही तापमान में वैसी गर्माहट महसूस की जा रही है जो आमतौर पर मार्च के मध्य में देखने को मिलती है। उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में शुष्क मौसम और बढ़ता तापमान अब एक नया ट्रेंड बनता जा रहा है।
मैदानी इलाकों का हाल: शुष्क हवाएँ और 'अर्ली समर' के संकेत
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में वर्तमान में कोई सक्रिय मौसम प्रणाली (Weather System) नहीं है। इसका सीधा परिणाम स्थिर आकाश (Stable Skies) और बढ़ते पारे के रूप में दिख रहा है।
- तापमान का उछाल: दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अधिकतम तापमान 26°C से 28°C के बीच बना हुआ है, जो सामान्य से लगभग 4-5 डिग्री अधिक है। राजस्थान के बाड़मेर और फलोदी जैसे क्षेत्रों में पारा 30°C के आंकड़े को भी छू रहा है।
- हल्की ठंड का अंत: न्यूनतम तापमान भी अब 11°C से 14°C के बीच स्थिर हो गया है, जिससे रात की कड़ाके की ठंड अब बीती बात हो गई है।
- शुष्क मौसम: पूरे उत्तर भारत के मैदानों में बारिश की संभावना शून्य है। हवा में नमी का स्तर दोपहर में 30-40% तक गिर जाता है, जिससे त्वचा में खुश्की महसूस हो सकती है।
कोहरा और विजिबिलिटी: सुबह का 'सफेद पहरा'
भले ही दिन गर्म हो रहे हों, लेकिन उत्तर भारत के कई राज्यों में सुबह के समय दृश्यता (Visibility) एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
- उत्तर प्रदेश: राज्य के लगभग 27 जिलों में आज सुबह मध्यम से घना कोहरा दर्ज किया गया। लखनऊ, आगरा और प्रयागराज जैसे शहरों में दृश्यता 50 से 200 मीटर तक गिर गई, जिससे रेल और सड़क यातायात पर असर पड़ा।
- पंजाब और हरियाणा: अमृतसर, लुधियाना और अंबाला में सुबह 'शैलो फॉग' (Shallow Fog) के कारण गाड़ियों की रफ्तार धीमी रही।
- पहाड़ों का असर: हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के निचले इलाकों में अभी भी 'ग्राउंड फ्रॉस्ट' (पाला) और धुंध का असर देखा जा रहा है, जो मैदानी इलाकों की ओर ठंडी हवाओं के झोंके भेज रहा है।
स्थिर आसमान और प्रदूषण का जाल
जब आसमान साफ और हवाएं शांत (10-15 किमी/घंटा) होती हैं, तो वायु गुणवत्ता बिगड़ने लगती है। आज पूरे उत्तर भारत के बेल्ट में AQI का स्तर चिंताजनक है:
- इंडो-गैंगेटिक प्लेन (Indo-Gangetic Plains): पंजाब से लेकर बिहार तक की बेल्ट में प्रदूषण के कण जमीन के करीब ही जमे हुए हैं।
- विजिबिलिटी का प्रदूषण से कनेक्शन: सुबह जो कोहरा दिखता है, वह वास्तव में 'स्मॉग' (Smog) का मिश्रण है, जो फेफड़ों के लिए हानिकारक है।
पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का इंतज़ार
मौसम विभाग के अनुसार, एक हल्का पश्चिमी विक्षोभ 12-13 फरवरी के आसपास हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इसका असर केवल पहाड़ों (जम्मू-कश्मीर, लद्दाख) में बर्फबारी तक सीमित रहेगा। मैदानी इलाकों को बारिश के लिए कम से कम 16-17 फरवरी तक का इंतज़ार करना होगा, जब एक मजबूत सिस्टम आने की उम्मीद है।
सावधानी की सलाह
वाहन चालक: सुबह के समय हेडलाइट्स ऑन रखें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
- किसान: बढ़ते तापमान को देखते हुए फसलों में नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई का प्रबंध करें।
- स्वास्थ्य: दिन और रात के तापमान में 15 डिग्री तक के अंतर के कारण वायरल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ गया है, इसलिए खान-पान का ध्यान रखें।
आज की स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि उत्तर भारत का मौसम एक संक्रमण काल (Transition Phase) से गुजर रहा है। जहाँ सुबह का घना कोहरा और धुंध सड़क यातायात के लिए चुनौती बनी हुई है, वहीं दिन के समय खिली धूप और शुष्क मैदानी हवाएँ समय से पहले गर्मी का अहसास करा रही हैं। स्थिर आसमान और हवा की धीमी गति ने प्रदूषण के स्तर को भी बढ़ा दिया है।
कुल मिलाकर, उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड का दौर अब समाप्त हो चुका है और आने वाले दिनों में पारा और चढ़ने की संभावना है। पहाड़ों पर किसी मजबूत पश्चिमी विक्षोभ की अनुपस्थिति के कारण मैदानी इलाकों में शुष्कता बनी रहेगी, जो स्वास्थ्य और कृषि दोनों के लिए सावधानी बरतने का संकेत है।

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