कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए पुख्ता तैयारियां; पर 5600 मीटर की ऊंचाई पर 'कुदरत' ले सकती है परीक्षा!
भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने 5,605 मीटर की ऊंचाई और अप्रत्याशित मौसम के बीच श्रद्धालुओं को सुरक्षा व स्वास्थ्य संबंधी जरूरी सलाह दी है।

तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित पवित्र कैलाश पर्वत का एक दृश्य
Kailash Mansarovar Yatra 2026 : सदियों की आस्था, दुर्गम रास्ते और महादेव के दर्शन की अटूट चाहत के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारियां अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी हैं। इस साल की यात्रा न सिर्फ धार्मिक लिहाज से बल्कि भौगोलिक चुनौतियों के मामले में भी बेहद असाधारण होने वाली है। चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने खुद सीमावर्ती इलाकों का दौरा करने के बाद रविवार को तीर्थयात्रियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील वीडियो संदेश जारी किया है। इस संदेश में जहां एक तरफ यात्रा की पुख्ता तैयारियों का भरोसा है, वहीं दूसरी तरफ श्रद्धालुओं को पल-पल बदलते मौसम और जानलेवा ऊंचाई को लेकर कड़ी चेतावनी भी दी गई है। इस बार की यात्रा इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि चीनी और पारंपरिक तिब्बती कैलेंडर के अनुसार यह दुर्लभ संयोग हर 12 साल में एक बार आता है, जिसके कारण वहां इस बार भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है।
भारतीय दूतावास की उच्चस्तरीय टीम ने खुद जमीनी स्तर पर उतरकर कैलाश पर्वत की परिक्रमा वाले पूरे मार्ग और आधिकारिक यात्रा के सभी प्रवेश द्वारों का बारीकी से निरीक्षण किया है। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए राजदूत और उनके सहयोगियों ने उन होटलों का भी जायजा लिया जहां तीर्थयात्री हर रात विश्राम करेंगे। इस दौरान होटलों की रसोई, कमरों की व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की गहराई से जांच की गई। चीनी सरकार के साथ मिलकर प्रबंधों को अंतिम रूप तो दे दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक अमला इस बात से पूरी तरह वाकिफ है कि कुदरत के इन दुर्गम रास्तों पर इंसानी तैयारियां कभी-कभी बौनी साबित हो जाती हैं। यही वजह है कि आधिकारिक तौर पर यात्रियों को मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद मजबूत रहने की हिदायत दी गई है।
इस यात्रा का सबसे खतरनाक और चुनौतीपूर्ण पहलू इसका भूगोल है। राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने वीडियो में अपनी खुद की स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि बात करते समय भी वहां सांसों की गति कितनी तीव्र हो जाती है। यह पूरा क्षेत्र अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित है, जहां यात्रियों को अपना अधिकांश समय समुद्र तल से 3,500 मीटर से भी अधिक की ऊंचाई पर बिताना होगा। सबसे कठिन परीक्षा उस वक्त होगी जब परिक्रमा का रास्ता लगभग 5,605 मीटर यानी करीब 6,000 मीटर की खड़ी ऊंचाई तक पहुंचेगा। इस ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम हो जाता है, जिससे 'एक्यूट माउंटेन सिकनेस' का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा कैलाश पर्वत के आसपास का मौसम इतना अप्रत्याशित है कि वहां एक ही समय में कड़कड़ाती धूप, भारी बर्फबारी और मूसलाधार बारिश का सामना करना पड़ सकता है। दूतावास ने यात्रियों को विशेष गर्म कपड़े रखने, नियमित रूप से ऑक्सीजन स्तर की जांच करने और स्वास्थ्य के प्रति रत्ती भर भी लापरवाही न बरतने की सख्त सलाह दी है।
धार्मिक और कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाने वाली यह यात्रा इस बार चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में नए सुरक्षा घेरे के साथ आयोजित हो रही है। आधिकारिक नियमों के तहत इस साल कुल 500 चुनिंदा श्रद्धालुओं को नाथू ला मार्ग से यात्रा करने की अनुमति दी गई है। सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए इन यात्रियों को 50-50 के 10 विशेष समूहों में विभाजित किया गया है। यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति या स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए हर एक समूह के साथ अनिवार्य रूप से एक संपर्क अधिकारी और एक योग्य मेडिकल सहायक को तैनात किया गया है। यह व्यवस्था चीन और भारत के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करने और किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए कानूनी व प्रशासनिक तौर पर बेहद जरूरी कदम है।
कैलाश मानसरोवर की यह पावन यात्रा भारतीय संस्कृति में केवल एक भौगोलिक सफर नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का मार्ग मानी जाती है। सालों के इंतजार के बाद जब इस साल यह यात्रा दोबारा शुरू हो रही है, तो श्रद्धालुओं का उत्साह सातवें आसमान पर है। हालांकि, कूटनीतिक तैयारियों और कड़े नियमों के बीच असली परीक्षा उस दुर्गम तिब्बती पठार पर होगी, जहां हर कदम महादेव की भक्ति और इंसान के धैर्य की परीक्षा लेगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन की यह चाक-चौबंद व्यवस्था और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था किस तरह प्रकृति की इन दुर्गम और जानलेवा चुनौतियों पर विजय पाती है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
