नई दिल्ली: उत्तर और मध्य भारत के एक बड़े हिस्से में चरम मौसमी बदलावों के कारण भीषण गर्मी और तीव्र लू (Heatwave) का प्रकोप जारी है, जिसने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। वैश्विक स्तर पर दर्ज किए गए तापमान के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में दुनिया के शीर्ष 15 सबसे गर्म शहरों की सूची में अकेले भारत के 9 शहर शामिल हो चुके हैं। इस अप्रत्याशित ताप लहर को देखते हुए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित कई राज्यों के लिए आगामी समय तक के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि पश्चिमी शुष्क हवाओं की निरंतरता, साफ आसमान और लगातार तेज धूप के संयोजन से मैदानी इलाकों में तापमान का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है, जिससे निकट भविष्य में इसके 50 डिग्री सेल्सियस के स्तर को छूने की आशंका पैदा हो गई है।

क्षेत्रीय स्तर पर दर्ज किए गए आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश का बांदा जिला इस समय देश का सबसे तप्त क्षेत्र बनकर उभरा है, जहां अधिकतम तापमान रिकॉर्ड 48 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्रों में भी झुलसाने वाली गर्मी का सिलसिला लगातार तीसरे दिन जारी रहा, जहां अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। मौसम विभाग का अनुमान है कि शुष्क पछुआ हवाओं के प्रभाव के कारण दिल्ली में यह पारा बढ़कर 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इस तीव्र गर्मी के कारण चिकित्सालयों में भी आपातकालीन ओपीडी में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, थकान, और मांसपेशियों में ऐंठन जैसी गर्मी से संबंधित बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में भारी उछाल दर्ज किया गया है, जिसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने अलग से दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

गर्मी के इस प्रचंड रूप का सीधा असर शहरी बुनियादी ढांचे, विशेषकर बिजली और पानी की आपूर्ति पर देखने को मिल रहा है। दिल्ली में एयर कंडीशनर और कूलिंग उपकरणों के अत्यधिक उपयोग के कारण बिजली की वास्तविक समय की मांग रिकॉर्ड 8,039 मेगावाट के स्तर पर पहुंच गई है, जो इस पूरे वर्ष का उच्चतम स्तर है। विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMs) के अनुसार, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में चालू सत्र के शुरुआती बीस दिनों में बिजली की कुल मांग में 65 से 75 प्रतिशत तक की अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। इसके साथ ही, देश के केंद्रीय जल आयोग (CWC) की हालिया रिपोर्ट ने एक नई चिंता को जन्म दे दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के 166 प्रमुख जलाशयों में कुल जल भंडारण क्षमता घटकर महज 34.45 प्रतिशत रह गई है, जिससे पेयजल और सिंचाई दोनों मोर्चों पर भारी दबाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

इस झुलसाती धूप का सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव समाज के श्रमजीवी वर्ग, विशेषकर गिग वर्कर्स और आउटडोर कामगारों पर पड़ रहा है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली के 'ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च एंड इंजरी प्रिवेंशन सेंटर' (TRIP) द्वारा जारी की गई नवीनतम केस स्टडी के अनुसार, लगभग 56 प्रतिशत गिग वर्कर्स, जिनमें डिलीवरी पार्टनर्स और कूरियर संचालक शामिल हैं, इस भीषण मौसम में भी दैनिक रूप से 12 घंटे से अधिक समय तक सड़कों पर काम करने के लिए मजबूर हैं। तीव्र धूप और हीट रैश के खतरों के बीच समय पर डिलीवरी करने के व्यावसायिक दबाव के कारण इन श्रमिकों का स्वास्थ्य गंभीर जोखिम में है। इस शोध टीम ने नीतिगत सिफारिश की है कि इन कामगारों को औपचारिक रूप से 'आउटडोर वर्कर्स' की श्रेणी में शामिल किया जाए ताकि उनके लिए कार्य के घंटे और हीट प्रोटेक्शन से संबंधित स्पष्ट वैधानिक नियम बनाए जा सकें।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस भीषण स्थिति के पीछे अल नीनो (El Nino) के प्रभाव और भू-आकृतिक कारकों को जिम्मेदार माना जा रहा है। यद्यपि दक्षिण-पश्चिम मानसून के समय से थोड़ा पहले पहुंचने के आनुषंगिक संकेत मिल रहे हैं, परंतु तब तक मैदानी भागों को इस तापीय दबाव से राहत मिलने की कोई संभावना नहीं दिखाई देती। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशयों का घटता स्तर और शहरी क्षेत्रों में कंक्रीट के जंगलों के कारण बनने वाले 'हीट आइलैंड इफेक्ट' इस स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना रहे हैं। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे दोपहर के समय बहुत आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलें और शरीर में पानी की कमी न होने दें, क्योंकि यह मौसमी दशा केवल एक सामान्य गर्मी न होकर एक गंभीर प्राकृतिक चुनौती का रूप ले चुकी है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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