भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच भारत में बिजली मांग ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। 21 मई 2026 को देश की बिजली खपत 270.82 गीगावॉट तक पहुंच गई। बढ़ते तापमान, एयर कंडीशनर के बढ़ते उपयोग, सौर ऊर्जा की भूमिका और सरकार की तैयारियों ने इस ऊर्जा संकट को राष्ट्रीय चर्चा का बड़ा मुद्दा बना दिया है।

देशभर में पड़ रही प्रचंड गर्मी ने भारत की बिजली व्यवस्था पर अभूतपूर्व दबाव पैदा कर दिया है। लगातार बढ़ते तापमान और हीटवेव के बीच 21 मई 2026 को देश की बिजली मांग 270.82 गीगावॉट तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है। लगातार चौथे दिन बिजली खपत ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए, जिससे साफ हो गया कि इस बार की गर्मी केवल मौसम नहीं बल्कि ऊर्जा क्षेत्र के लिए भी बड़ी चुनौती बन चुकी है।

22 मई को केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि भीषण गर्मी के कारण पिछले चार दिनों में बिजली मांग लगातार नए स्तर पर पहुंची है। मंत्रालय के अनुसार 18 मई को देश की अधिकतम बिजली मांग 257.37 गीगावॉट दर्ज की गई थी। इसके बाद 19 मई को यह बढ़कर 260.45 गीगावॉट, 20 मई को 265.44 गीगावॉट और 21 मई को रिकॉर्ड 270.82 गीगावॉट तक पहुंच गई। मंत्रालय ने कहा कि आमतौर पर दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे के बीच बिजली की मांग सबसे अधिक रहती है। सरकार ने भरोसा दिलाया कि पर्याप्त बिजली आपूर्ति की तैयारी है, लेकिन नागरिकों से बिजली का समझदारी से उपयोग करने की अपील भी की गई है।



विशेषज्ञों के अनुसार इस रिकॉर्ड मांग के पीछे सबसे बड़ा कारण उत्तर और मध्य भारत में जारी भीषण हीटवेव है। दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। भारतीय मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ने की चेतावनी दी है। गर्मी बढ़ने के साथ घरों, दफ्तरों और बाजारों में एयर कंडीशनर, कूलर, पंखे और रेफ्रिजरेशन सिस्टम का उपयोग तेजी से बढ़ा है। अब भारत में गर्मियों के दौरान बिजली खपत का बड़ा हिस्सा केवल कूलिंग उपकरणों से आने लगा है। यही वजह है कि दोपहर के समय बिजली मांग अचानक रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच रही है।

हालांकि इस संकट के बीच सौर ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों ने बड़ी राहत दी है। भारत के पास इस समय 228 गीगावॉट से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता है। दिन के समय सौर ऊर्जा ने बिजली ग्रिड पर दबाव कम करने में अहम भूमिका निभाई। रिपोर्ट्स के अनुसार हाल के रिकॉर्ड मांग वाले दिनों में करीब 21 प्रतिशत बिजली आपूर्ति सौर ऊर्जा से हुई। इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि शाम के समय स्थिति चुनौतीपूर्ण हो जाती है, क्योंकि सूर्यास्त के बाद सौर ऊर्जा उत्पादन घट जाता है जबकि कूलिंग उपकरणों की मांग बनी रहती है। देश में बैटरी स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर अभी सीमित है, इसलिए भारत आज भी 70 प्रतिशत से अधिक बिजली उत्पादन के लिए कोयले पर निर्भर है।

बढ़ती मांग को देखते हुए बिजली कंपनियों और वितरण एजेंसियों ने लंबी अवधि के पावर परचेज एग्रीमेंट, अतिरिक्त बिजली खरीद, एआई आधारित डिमांड फोरकास्टिंग और आपातकालीन प्रबंधन जैसे कदम तेज कर दिए हैं। दिल्ली की बिजली कंपनियों बीएसईएस और टाटा पावर ने भी कहा है कि वे लगातार बढ़ती मांग से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रिकॉर्ड भारत के तेजी से बदलते ऊर्जा परिदृश्य का संकेत है। बढ़ता शहरीकरण, एयर कंडीशनर की बढ़ती बिक्री, औद्योगिक विस्तार और जलवायु परिवर्तन के कारण देश में बिजली मांग पहले से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले वर्षों में भारत के सामने मजबूत बिजली ढांचा, स्मार्ट ग्रिड और बड़े स्तर पर ऊर्जा भंडारण विकसित करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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