भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए एक बेहद असाधारण और चौंकाने वाली मौसमी चेतावनी जारी की है। इस समय पूरा देश मौसम के दो बिल्कुल विपरीत और चरम रूपों का गवाह बन रहा है। जहां एक तरफ उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के विशाल भूभाग भीषण गर्मी और जानलेवा लू की चपेट में आकर आग की भट्ठी की तरह तप रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पूर्वोत्तर भारत, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और दक्षिण के कई राज्यों में बादलों ने डेरा डाल दिया है। इन राज्यों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश और तेज तूफानी हवाओं का दौर शुरू हो गया है, जिससे स्थानीय निवासियों को इस जानलेवा तपन से बड़ी राहत मिली है।

देश की राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में सूर्य देव का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में लू से लेकर गंभीर हीटवेव चलने की आशंका जताई गई है, जहां दिन का अधिकतम तापमान पैंतालीस डिग्री सेल्सियस से लेकर सैंतालीस डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने की पूरी संभावना है। उत्तर प्रदेश का बांदा जिला इस समय पूरे देश में सबसे गर्म स्थान बनकर उभरा है, जहां पारा अड़तालीस दशमलव दो डिग्री सेल्सियस के रिकॉर्ड स्तर को छू गया है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, बिहार, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश में भी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। इन राज्यों में गर्म और शुष्क हवाओं के थपेड़ों ने लोगों का घरों से निकलना दूभर कर दिया है। रात के समय भी तापमान सामान्य से अधिक रहने के कारण उमस भरी गर्मी से कोई राहत नहीं मिल रही है।

इस भीषण और असहनीय तपन के बीच देश के दूसरे छोर से राहत की बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के लगभग पंद्रह राज्यों में मानसून पूर्व की गतिविधियों और चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र के कारण मौसम पूरी तरह बदल गया है। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में हल्की से मध्यम बारिश के साथ ही चालीस से पचास किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। अरुणाचल प्रदेश और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में तो कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। दक्षिण भारत की बात करें तो केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, लक्षद्वीप और कर्नाटक के विभिन्न हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक के साथ आंधी चलने और बौछारें पड़ने की उम्मीद है, जिससे वहां के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

मौसम वैज्ञानिकों ने इस विपरीत मौसमी घटनाक्रम के पीछे के आधिकारिक और तकनीकी कारणों को स्पष्ट किया है। उनके अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत से आ रही गर्म और शुष्क पछुआ हवाओं के कारण मैदानी इलाकों में तापमान सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस तक ऊपर चला गया है, जिसने एक मजबूत हीटवेव डोम का निर्माण किया है। दूसरी ओर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नमी से भरी हवाएं पूर्वोत्तर और दक्षिणी प्रायद्वीप में भारी वर्षा प्रणाली को सक्रिय कर रही हैं। सबसे महत्वपूर्ण आधिकारिक अपडेट यह है कि देश की कृषि की जीवनरेखा कहा जाने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसके छब्बीस मई के आसपास केरल के तट पर दस्तक देने की प्रबल संभावना बन चुकी है।

इस बेहद गंभीर मौसमी संकट को देखते हुए विभिन्न राज्य सरकारों और आपदा प्रबंधन विभागों ने स्वास्थ्य संबंधी एडवाइजरी जारी की है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और संवेदनशील स्वास्थ्य स्थिति वाले लोगों को दोपहर के समय सीधे धूप के संपर्क में आने से बचने की सख्त हिदायत दी है। भीषण गर्मी के कारण हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि मैदानी इलाकों में यह जानलेवा हीटवेव अगले सात दिनों तक इसी तरह जारी रह सकती है, जिसके कारण आने वाले दिनों में बिजली और पानी की मांग में भारी उछाल आने से प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर दबाव और अधिक बढ़ने की आशंका है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story