कुदरत का 'क्रेजी' मूड: मई में दिसंबर वाली ठंड, हिमाचल में चार दिन की राहत के बाद फिर लौटेगा आफत का दौर!
प्रदेश में 7 से 10 मई तक मौसम साफ रहने का अनुमान, भारी बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान के बाद 11 मई से फिर बदलेगा मिजाज।

हिमाचल प्रदेश में पिछले दिनों हुई भारी ओलावृष्टि और तेज आंधी के कारण प्रभावित जनजीवन और फसलों को पहुंचा नुकसान।
शिमला। देवभूमि हिमाचल प्रदेश में बीते कई दिनों से जारी कुदरत का तांडव अब थोड़ा थमता नजर आ रहा है। पिछले चार दिनों से प्रदेश के जनजीवन को अस्त-व्यस्त करने वाला पश्चिमी विक्षोभ अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ गया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के ताजा बुलेटिन के अनुसार, राज्य में 7 मई से लेकर 10 मई तक मौसम के साफ रहने के आसार हैं, जिससे स्थानीय निवासियों और बागवानों को भीषण वर्षा, ओलावृष्टि और तेज आंधी से कुछ समय के लिए राहत मिलेगी। हालांकि, यह शांति केवल एक छोटे अंतराल की तरह है, क्योंकि 11 मई से एक और नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जो फिर से मौसमी उथल-पुथल मचा सकता है।
हिमाचल प्रदेश में इस बार मई के महीने ने दिसंबर की याद दिला दी है। चिलचिलाती गर्मी के बजाय लोग स्वेटर और जैकेट निकालने पर मजबूर हैं। बीते चार दिनों में हुई मूसलधार बारिश और ओलावृष्टि ने न केवल तापमान में भारी गिरावट दर्ज की है, बल्कि प्रदेश की रीढ़ कही जाने वाली कृषि और बागवानी को भी गहरे घाव दिए हैं। शिमला, मंडी, कुल्लू और सिरमौर जैसे जिलों में ओलावृष्टि ने गेहूं की तैयार फसल और सेब के बागों को भारी नुकसान पहुंचाया है। बुधवार को भी शिमला और मंडी सहित कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई, जिससे फिजाओं में ठंडक और बढ़ गई।
तबाही की सबसे डरावनी तस्वीर शिमला जिले के रामपुर उपमंडल से सामने आई है। यहाँ के पंद्रह बीस क्षेत्र में बुधवार को हुई मूसलधार बारिश ने गानवी खड्ड के जलस्तर को खतरे के निशान के करीब पहुंचा दिया। उफनती खड्ड के वेग ने देखते ही देखते छह कलवर्ट (छोटी पुलियां) बहा दीं, जिससे गानवी, कूट और क्याव जैसी महत्वपूर्ण पंचायतों का संपर्क शेष दुनिया से पूरी तरह कट गया है। यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर गानवी जल विद्युत परियोजना के बांध में पानी रोक दिया है ताकि निचले इलाकों में जान-माल का नुकसान न हो।
वहीं, सिरमौर जिले के संगड़ाह में भी प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला। मंगलवार शाम वालिया लाइमस्टोन खदान से वर्षा के बाद आए मलबे के सैलाब ने कोहराम मचा दिया। खदान से बहकर आए भारी मलबे में एक कार और एक मोटरसाइकिल पूरी तरह दब गई। गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन संपत्ति की भारी क्षति ने स्थानीय लोगों को दहशत में डाल दिया है। भूस्खलन और मलबे के आने की आशंका को देखते हुए पहाड़ी रास्तों पर सफर करना फिलहाल जोखिम भरा बना हुआ है।
सांख्यिकीय दृष्टि से देखें तो इस साल मई के शुरुआती दिनों ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में अब तक सामान्य से 28 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है। जहाँ इस अवधि में औसत वर्षा का आंकड़ा 13.9 मिलीमीटर रहता था, वहीं इस साल यह बढ़कर 17.8 मिलीमीटर तक पहुंच गया है। तापमान की बात करें तो प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस नीचे चल रहा है। कुछ दुर्गम क्षेत्रों में तो यह गिरावट 8 डिग्री तक दर्ज की गई है, जिससे मई के महीने में भी कड़ाके की ठंड का अहसास हो रहा है।
मौसम विभाग की चेतावनी उन किसानों के लिए चिंता का विषय है जो अभी पिछले नुकसान से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। 11 मई से सक्रिय होने वाला नया मौसमी सिस्टम दो दिनों तक प्रदेश में फिर से वर्षा का दौर शुरू कर सकता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ओलावृष्टि का दौर दोबारा शुरू होता है, तो सेब की सेटिंग और गेहूं की कटाई पर इसके विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को नदी-नालों से दूर रहने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। हिमाचल की इस बदलती आबो-हवा ने एक बार फिर जलवायु परिवर्तन की गंभीर दस्तक का अहसास करा दिया है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
