देश के इन राज्यों में शुरू हुई जानलेवा गर्मी ; IMD ने जारी किया हीटवेव अलर्ट
अप्रैल 2026 में ही भारत में भीषण गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जहां कई राज्यों में तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। IMD ने अप्रैल से जून तक सामान्य से अधिक हीटवेव की चेतावनी दी है, जिससे जनजीवन, स्वास्थ्य और कामकाज पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

भारत का थर्मल मैप का थर्मल मैप
अभी अप्रैल का महीना चल रहा है, लेकिन देश के कई हिस्सों में गर्मी ने मानो जून-जुलाई की तीव्रता को भी पीछे छोड़ दिया है। भारत इस समय एक असामान्य और तीव्र हीटवेव की चपेट में है, जहां कई राज्यों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। यह स्थिति सामान्य मौसमी पैटर्न से कहीं अधिक गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि आमतौर पर ऐसी चरम गर्मी मई-जून के दौरान देखने को मिलती है।
महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य भारत के कई शहरों में पारा लगातार 40 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। नागपुर जैसे शहरों में तापमान 44 डिग्री तक पहुंच गया है, जबकि पुणे और अहमदाबाद में भी 41 से 42 डिग्री के बीच गर्मी दर्ज की जा रही है। स्थिति इतनी विकट है कि सुबह और रात के समय भी तापमान में अपेक्षित गिरावट नहीं हो रही, जिससे लोगों को चौबीसों घंटे गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।
इस असामान्य गर्मी को लेकर भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पहले ही चेतावनी जारी कर दी है। विभाग के अनुसार अप्रैल से जून के बीच इस वर्ष सामान्य से अधिक हीटवेव के दिन दर्ज किए जा सकते हैं। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में अप्रैल के मध्य तक ही तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाना इस बात का संकेत है कि इस साल गर्मी ने समय से पहले ही अपने चरम रूप में दस्तक दे दी है।
इस तीव्र गर्मी का असर सीधे तौर पर आम जनजीवन पर पड़ रहा है। अस्पतालों में हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और थकावट के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, खासकर उन लोगों में जो खुले में काम करते हैं या संवेदनशील वर्ग से आते हैं। शहरों में दोपहर के समय बाजार सूने नजर आने लगे हैं, कामकाज के समय में बदलाव किया जा रहा है और पानी व ठंडक से जुड़े संसाधनों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में भी तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रह सकता है और मध्य व दक्षिण भारत में हीटवेव की स्थिति जारी रहने की आशंका है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश से अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन कुल मिलाकर गर्मी की तीव्रता में कोई बड़ी कमी आने के संकेत नहीं हैं।
अप्रैल में ही इस तरह की भीषण गर्मी का प्रकोप न केवल मौसमी असंतुलन की ओर इशारा करता है, बल्कि यह आने वाले महीनों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। यदि यही रुझान जारी रहा, तो देश को इस साल एक लंबी और अधिक खतरनाक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है, जिसका असर स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन पर व्यापक रूप से देखने को मिलेगा।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
