नई दिल्ली/नोएडा: राजधानी दिल्ली समेत समूचे उत्तर भारत में इस वक्त कुदरत का दोहरा प्रहार जारी है। पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं और मैदानी इलाकों में छाए घने कोहरे ने जनजीवन की रफ्तार पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है। शनिवार, 10 जनवरी 2026 की सुबह जब दिल्ली-NCR के लोगों की आँख खुली, तो नजारा किसी डरावनी फिल्म जैसा था; खिड़की के बाहर केवल सफेद धुंध की चादर थी और दृश्यता (Visibility) शून्य से 50 मीटर के बीच सिमट कर रह गई थी। मौसम विभाग (IMD) ने इसे 'डबल अटैक' करार देते हुए चेतावनी दी है कि अगले 48 घंटे बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।

घने कोहरे के कारण दिल्ली के पालम और सफदरजंग हवाई अड्डों पर उड़ानों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हवाई पट्टी पर दृश्यता कम होने की वजह से कई उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा और दर्जनों उड़ानें घंटों की देरी से चल रही हैं। रेलवे का हाल भी इससे जुदा नहीं है; कोहरे की मार ने उत्तर भारत की ओर आने वाली 'राजधानी' और 'शताब्दी' जैसी प्रीमियम ट्रेनों को भी रेंगने पर मजबूर कर दिया है। सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आ रहे हैं और हेडलाइट्स जलने के बावजूद कुछ ही दूरी का देख पाना मुश्किल हो रहा है।

प्रशासनिक स्तर पर इस संकट से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। फिरोजपुर के सिविल सर्जन डॉ. राजीव पराशर और रोहतक के उपायुक्त सचिन गुप्ता ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि लोग बिना अति-आवश्यक कार्य के घर से बाहर न निकलें। धौलपुर के जिला कलेक्टर श्रीनिधि बी टी और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. धर्मसिंह मीणा ने कोहरे के दौरान होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस को हाईवे पर गश्त बढ़ाने के आदेश दिए हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कक्षा 8 तक के स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है ताकि बच्चों को इस जानलेवा ठंड से बचाया जा सके।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोहरा केवल विजिबिलिटी ही कम नहीं कर रहा, बल्कि इसमें घुले प्रदूषक तत्व फेफड़ों के लिए जहर समान हैं। बैतूल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कुमार हुरमाड़े और लुधियाना की सिविल सर्जन डॉ. रमनदीप कौर ने दिल और सांस के मरीजों को सुबह की सैर पूरी तरह बंद करने की सलाह दी है। जिला मास मीडिया अधिकारी संजीव शर्मा, और डिप्टी मास मीडिया अधिकारी अंकुश भंडारी व नेहा भंडारी लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को ठंड से बचाव के लिए जागरूक कर रहे हैं।

आंकड़ों की बात करें तो न्यूनतम तापमान 4 से 6 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जो सामान्य से काफी नीचे है। मौसम विभाग के अनुसार, अभी इस कड़कड़ाती ठंड और कोहरे से राहत मिलने की उम्मीद कम है। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि अर्थव्यवस्था और परिवहन पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ रहा है। आने वाले कुछ दिन उत्तर भारतीयों के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं होंगे।

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