स्पेन का 'छोटा बच्चा' बनेगा महंगाई का तूफान? किसानों के बजट और रसोई पर मंडरा रहा खतरा।
कम बारिश की आशंका के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रभावित जिलों में वैकल्पिक फसलों के बीजों की व्यवस्था की जाएगी।

भारत में खरीफ सीजन की शुरुआत के दौरान ग्रामीण इलाके के एक पानी से भरे खेत में पारंपरिक तरीके से धान की रोपाई करते हुए भारतीय किसान।
वैश्विक स्तर पर गहराते भू-राजनीतिक संकट और जलवायु परिवर्तन के अप्रत्याशित थपेड़ों के बीच भारतीय कृषि क्षेत्र के सामने एक बार फिर से प्रकृति की कड़ी परीक्षा की घड़ी आ खड़ी हुई है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के आर्थिक प्रभावों और प्रशांत महासागर में तेजी से सक्रिय हो रहे अल नीनो प्रभाव के कारण इस वर्ष देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रभावित होने की गंभीर आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। मॉनसून के कमजोर पड़ने की स्थिति में फसलों के उत्पादन में गिरावट और इसके परिणामस्वरूप खाद्य महंगाई में संभावित बढ़ोतरी के जोखिम को देखते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय पूरी तरह से सतर्क हो गया है। देश के करोड़ों किसानों को मौसम की इस संभावित मार से सुरक्षित रखने के लिए मंत्रालय ने अभी से एक व्यापक और सुदृढ़ सुरक्षा कवच तैयार करने की प्रशासनिक कवायद शुरू कर दी है।
इस उभरते संकट और सरकार की तैयारियों को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित दो दिवसीय खरीफ सम्मेलन के दौरान देश को आश्वस्त किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यद्यपि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की ओर से अभी तक अंतिम और पूर्ण अनुमान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सरकार किसी भी संभावित परिस्थिति से निपटने के लिए अग्रिम रूप से पूरी कार्ययोजना तैयार कर रही है ताकि अल नीनो के कारण देश की फसलों और किसानों की आजीविका पर कोई भी विपरीत प्रभाव न पड़े। कृषि मंत्री ने किसानों और आम जनता से पैनिक न होने की अपील करते हुए कहा कि अल नीनो के प्रभाव को लेकर इस समय बाजार में जो बातें चल रही हैं, वे केवल प्रारंभिक अटकलें हैं और उनसे घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
सरकार की ओर से तैयार की जा रही इस आपातकालीन रणनीति के तहत देश के उन संवेदनशील जिलों की सघन पहचान की जा रही है, जहां ऐतिहासिक रूप से कम वर्षा होने का सबसे अधिक खतरा बना रहता है। कृषि मंत्री ने नीतिगत तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि यदि मुख्य मॉनसूनी फसलों की बुआई के दौरान देश के कुछ विशिष्ट हिस्सों में तापमान सामान्य से अत्यधिक ऊपर जाता है या बारिश के दो चरणों के बीच एक लंबा और शुष्क अंतराल आता है, तो उन क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक फसलों की बुआई की व्यवस्था की जाएगी। संकट की स्थिति में किसानों को कम पानी और अधिक तापमान में भी जीवित रहने वाली फसलों के विशेष बीज समय पर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकारों के सहयोग से बीजों का एक मजबूत बफर स्टॉक तैयार किया जा रहा है।
जलवायु विज्ञान के नजरिए से यदि देखा जाए तो अल नीनो मूल रूप से स्पेनिश भाषा का एक शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ 'छोटा बच्चा' होता है। समुद्र विज्ञान में यह घटना तब घटित होती है जब प्रशांत महासागर में पेरू के तटीय क्षेत्रों के निकट समुद्र की सतह का तापमान सामान्य ऐतिहासिक औसत से लगभग चार से पांच डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म हो जाता है। समुद्र के पानी में पैदा होने वाली यह अतिरिक्त गर्मी वैश्विक स्तर पर चलने वाली मानसूनी हवाओं के पारंपरिक रास्ते और उनकी गति को बुरी तरह बाधित कर देती है, जिसके चलते दुनिया भर का मौसम चक्र पूरी तरह से असंतुलित हो जाता है। भारत के संदर्भ में अल नीनो का सीधा संबंध कमजोर मॉनसून और सूखे जैसी विषम परिस्थितियों से जोड़ा जाता रहा है।
मौसम विभाग द्वारा पूर्व में जारी किए गए शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, इस वर्ष देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान होने वाली कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत यानी लॉन्ग पीरियड ऐवरेज के लगभग 92 प्रतिशत तक ही सीमित रह सकती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में सामान्य से कम वर्षा की श्रेणी में रखा जाता है। चूंकि देश में खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, बाजरा और दलहन की बुआई का मुख्य सीजन जून के दूसरे सप्ताह से गति पकड़ने लगता है, इसलिए आने वाले कुछ सप्ताह भारतीय कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक राज्य की भौगोलिक और मौसमी आवश्यकताओं के अनुरूप पूरी तरह से लचीली नीतियां अपनाई जाएंगी ताकि देश के खाद्यान्न उत्पादन के लक्ष्यों को बिना किसी बाधा के सुरक्षित हासिल किया जा सके।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
