नई दिल्ली:

राजधानी दिल्ली में एक बार फिर प्रदूषण का स्तर बढ़ने से नागरिकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। 12 मार्च 2026 को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 190 से 200 के बीच दर्ज किया गया है, जो 'अनहेल्दी' (अस्वास्थ्यकर) श्रेणी में आता है। मार्च के महीने में जब आमतौर पर हवाएं तेज चलती हैं, प्रदूषण के इस स्तर ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को चौकन्ना कर दिया है।

प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय दिल्ली की हवा बिगड़ने के पीछे तीन प्रमुख कारक काम कर रहे हैं:

  • धूल भरी हवाएं: राजस्थान के थार रेगिस्तान और पड़ोसी क्षेत्रों से आने वाली शुष्क पश्चिमी हवाएं अपने साथ बड़ी मात्रा में धूल ला रही हैं, जिससे PM10 का स्तर बढ़ गया है।
  • हवा की धीमी गति: पिछले 24 घंटों में हवा की रफ्तार काफी कम रही है, जिससे प्रदूषक कण वायुमंडल में एक ही जगह जमा हो गए हैं और बिखर नहीं पा रहे हैं।
  • तापमान में वृद्धि: समय से पहले बढ़ी गर्मी ने जमीन के पास की हवा को स्थिर कर दिया है, जिससे 'हस्तक्षेप की स्थिति' (Inversion-like conditions) बन रही है और धुंध (Haze) की चादर दिल्ली के ऊपर छाई हुई है।

स्वास्थ्य पर असर और चेतावनी

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हवा में PM2.5 और PM10 कणों की अधिकता फेफड़ों और हृदय प्रणाली के लिए घातक हो सकती है।

  • संवेदनशील समूह: बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को सलाह दी गई है कि वे सुबह और शाम के समय बाहर निकलने से बचें।
  • मरीजों के लिए खतरा: अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को मास्क का उपयोग करने और भारी शारीरिक व्यायाम से बचने के निर्देश दिए गए हैं।
  • आंखों में जलन: हवा में धूल और ओजोन के बढ़ते स्तर के कारण आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायतें भी बढ़ रही हैं।

आने वाले दिनों का अनुमान

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का कहना है कि अगले 2-3 दिनों तक स्थिति इसी तरह बनी रह सकती है। हालांकि, 14-15 मार्च के आसपास संभावित 'पश्चिमी विक्षोभ' के कारण यदि हल्की बारिश होती है या हवा की गति बढ़ती है, तो प्रदूषण के स्तर में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल, आनंद विहार, मुंडका और वजीरपुर जैसे इलाकों में AQI का स्तर 200 के भी पार बना हुआ है।

नागरिक सावधानी जरूरी

दिल्ली की हवा में यह अचानक आया बदलाव इस बात का संकेत है कि प्रदूषण अब केवल सर्दियों की समस्या नहीं रह गई है। बढ़ते तापमान और धूल के कणों के मेल ने मार्च में भी 'स्मॉग' जैसी स्थिति पैदा कर दी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें और धूल उड़ने वाली गतिविधियों को नियंत्रित रखें।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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