नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों (एनसीआर) में मौसम का मिजाज लगातार आक्रामक होता जा रहा है। भीषण गर्मी की मार झेल रहे दिल्ली-एनसीआर के निवासियों को फिलहाल इस तपिश से राहत मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में मौसमी परिस्थितियों में और अधिक कड़वाहट देखने को मिल सकती है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है कि अगले चौबीस घंटों के भीतर दिल्ली और एनसीआर के विस्तृत क्षेत्रों में भीषण लू (हीटवेव) का प्रकोप एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच सकता है, जिससे आम जनजीवन व्यापक रूप से प्रभावित होने की आशंका है।

मौसम विभाग के आंकड़ों और विश्लेषण के अनुसार, क्षेत्र में शुष्क पश्चिमी हवाओं के निरंतर प्रवाह के कारण तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। अनुमान है कि कल दिल्ली का अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा सकता है। यह सामान्य से कई डिग्री अधिक है, जो स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील स्थिति पैदा करता है। केवल अत्यधिक तापमान ही नहीं, बल्कि मैदानी इलाकों में सक्रिय मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से कुछ चुनिंदा पॉकेट्स और संवेदनशील इलाकों में तेज गति से धूल भरी गर्म हवाएं चलने की भी प्रबल संभावना व्यक्त की गई है। दोपहर के समय हवा की रफ्तार बढ़ने से सड़कों पर चलने वाले राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ने वाली हैं।

प्रादेशिक मौसम पूर्वानुमान केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति उत्तर-पश्चिम भारत के वायुमंडलीय दबाव में आ रहे बदलावों का परिणाम है। दिल्ली के प्रमुख मौसम केंद्रों जैसे सफदरजंग, पालम, नजफगढ़ और मुंगेशपुर में तापमान सामान्य स्तर की सीमाओं को पार कर चुका है। नजफगढ़ और मुंगेशपुर जैसे खुले और अर्ध-शहरी इलाकों में कंक्रीट के अत्यधिक निर्माण और हरियाली की कमी की वजह से तापमान के 45 डिग्री से भी ऊपर जाने की आशंका जताई गई है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, जब तक क्षेत्र में कोई सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) दस्तक नहीं देता या बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम पूर्वी हवाएं सक्रिय नहीं होतीं, तब तक इस झुलसाने वाली स्थिति से स्थायी निजात मिलना संभव नहीं है।

इस प्रशासनिक और मौसमी आपातकाल को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सरकारी विभागों ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारियों ने आपातकालीन परामर्श जारी करते हुए नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच अत्यंत आवश्यक न होने पर घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है। सरकारी अस्पतालों को हीट स्ट्रोक (लू लगना) के मरीजों के लिए विशेष वार्ड और पर्याप्त मात्रा में ओआरएस (ORS) तथा जीवन रक्षक दवाएं तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। श्रम विभाग ने भी निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के काम के घंटों को लेकर दिशा-निर्देशों की समीक्षा शुरू की है ताकि तेज धूप में काम करने वाले श्रमिकों को लू की चपेट में आने से बचाया जा सके।

मौसम विभाग का यह नया अलर्ट न केवल एक मौसमी बदलाव है, बल्कि यह दिल्ली-एनसीआर के पर्यावरण और बढ़ते शहरीकरण के कारण उत्पन्न हो रहे 'अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव की गंभीर चुनौती को भी रेखांकित करता है। हर साल रिकॉर्ड तोड़ते तापमान और लगातार लंबे होते लू के दौर ने नीति निर्माताओं के सामने एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में यदि मौसमी दशाएं इसी प्रकार बनी रहीं, तो बिजली और पानी की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि होना तय है, जिससे बुनियादी ढाँचे पर भी भारी दबाव पड़ेगा। फिलहाल, दिल्लीवासियों को इस भीषण प्राकृतिक तपिश का सामना बेहद सतर्कता और सावधानी के साथ करना होगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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