नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में मौसम ने एक ऐसी करवट ली है जिसने पिछले करीब दो दशकों के इतिहास को झकझोर कर रख दिया है। अप्रैल का महीना, जो आमतौर पर चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों के लिए जाना जाता है, इस बार जलमग्न सड़कों और खुशनुमा हवाओं का गवाह बना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा साझा किए गए नवीनतम आंकड़ों ने यह प्रमाणित कर दिया है कि साल 2008 के बाद यह पहली बार है जब राजधानी में अप्रैल के महीने में इतनी सघन वर्षा दर्ज की गई है। इस अप्रत्याशित बदलाव ने न केवल आम नागरिकों को गर्मी से फौरी राहत दी है, बल्कि मौसम वैज्ञानिकों को भी जलवायु परिवर्तन के नए पैमानों पर शोध करने के लिए मजबूर कर दिया है।

आंकड़ों की गहराई में जाएं तो पता चलता है कि शनिवार तक दिल्ली के प्राथमिक मौसम केंद्र सफदरजंग में कुल 28.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की जा चुकी है। यह आंकड़ा अप्रैल महीने के दीर्घकालिक औसत यानी एलपीए (16.3 मिमी) से कहीं अधिक है। यदि ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य की बात करें तो इससे पहले अप्रैल 2008 में दिल्ली ने 38.6 मिमी बारिश का सामना किया था। इस वर्ष की बारिश ने वर्तमान दशक के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। सफदरजंग के अलावा दिल्ली के अन्य हिस्सों जैसे पालम में 35.8 मिमी, आयानगर में 36.5 मिमी और लोधी रोड में 28.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो यह दर्शाती है कि बारिश का वितरण पूरी राजधानी में व्यापक और सघन रहा है।

आईएमडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले 24 घंटों के भीतर सफदरजंग में हुई 12.4 मिमी बारिश साल 2023 के बाद एक दिन में हुई सर्वाधिक वर्षा है। वहीं पालम केंद्र पर दर्ज की गई वर्षा अप्रैल महीने के इतिहास में सातवीं सबसे बड़ी एक दिवसीय बारिश के रूप में दर्ज की गई है। हालांकि, दिल्ली के इतिहास का सबसे 'गीला' अप्रैल 16 अप्रैल 1983 को दर्ज किया गया था, जब सफदरजंग में 134 मिमी और पालम में 117.8 मिमी की अभूतपूर्व वर्षा हुई थी। उस वर्ष के बाद यह वर्तमान दौर सबसे सक्रिय मानसूनी हलचल वाला अप्रैल साबित हो रहा है।

इस भारी बारिश के कानूनी और आधिकारिक निहितार्थों को देखें तो मौसम विभाग ने इसे पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता का परिणाम बताया है। बारिश के कारण शनिवार को राजधानी के तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। सफदरजंग में न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.8 डिग्री कम होकर 19.8 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जिसने सुबह के समय दिल्लीवासियों को हल्की ठंड का एहसास कराया। हालांकि, अधिकतम तापमान अभी भी 39.5 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जो सामान्य से थोड़ा अधिक है, लेकिन पिछले दिनों की तुलना में इसमें डेढ़ डिग्री की गिरावट देखी गई है।

दिल्ली में हुई यह रिकॉर्ड तोड़ बारिश केवल एक सांख्यिकीय घटना नहीं है, बल्कि यह बदलती वैश्विक मौसमी प्रवृत्तियों का एक अहम हिस्सा है। जहां एक ओर इस बारिश ने प्रदूषण के स्तर को कम करने और भीषण गर्मी को थामने में मदद की है, वहीं दूसरी ओर इसने शहरी बुनियादी ढांचे की तैयारियों पर भी सवाल खड़े किए हैं। मौसम विभाग की भविष्यवाणियों के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है, जो यह संकेत देता है कि 2008 का सर्वकालिक रिकॉर्ड भी इस साल खतरे में पड़ सकता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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