दशहरे के पावन पर्व पर हुई भारी आतिशबाजी और पराली के धुएं ने मिलकर दिल्ली-एनसीआर की हवा को बेहद जहरीला बना दिया है। इस सीजन में पहली बार दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई 'खराब' श्रेणी में दर्ज किया गया है। दशहरे के अगले दिन के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले पांच सालों यानी साल 2022 से 2026 के बीच इस दिन हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही है। बुधवार को दिल्ली का एक्यूआई बढ़कर सीधे 245 के स्तर पर पहुंच गया, जो स्थिति की गंभीरता को साफ बयान करता है।

बढ़ते प्रदूषण के इस गंभीर स्तर को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने तुरंत कदम उठाते हुए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी ग्रैप (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले साल यानी 2025 में ग्रैप का पहला चरण 14 अक्टूबर को लागू किया गया था, जिसके मुकाबले इस बार यह सात दिन की देरी से लागू हुआ है। ग्रैप के पहले चरण के तहत निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर कड़ी सख्ती बरती जा रही है, खुले में कचरा जलाने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है तथा होटल और ढाबों में कोयले या लकड़ी के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।

सरकारी एजेंसियों के आकलन के अनुसार, बुधवार को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी 3.9 प्रतिशत दर्ज की गई थी। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह हिस्सा गुरुवार को बढ़कर 7.4 प्रतिशत और शुक्रवार तक बढ़कर 16 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, हवा की गति धीमी यानी 10 किलोमीटर प्रति घंटे से कम रहने के कारण वातावरण में प्रदूषक तत्व टिके हुए हैं। इसी वजह से मौसम विभाग का अनुमान है कि गुरुवार से लेकर शनिवार तक हवा इसी तरह 'खराब' श्रेणी में बनी रह सकती है।

दिल्ली के साथ-साथ आसपास के एनसीआर क्षेत्रों में भी प्रदूषण का असर साफ देखा जा रहा है। बुधवार को दर्ज किए गए आंकड़ों के अनुसार दिल्ली का एक्यूआई 245, ग्रेटर नोएडा का 280, नोएडा का 249, गाजियाबाद का 223 और गुड़गांव का 216 दर्ज किया गया। स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने ट्रैफिक और अन्य व्यवस्थाओं पर जांच तेज कर दी है। इसके तहत प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) का उल्लंघन करने वाले वाहनों, धुआं छोड़ने वाली गाड़ियों और पुराने वाहनों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

दिल्ली-एनसीआर में केवल इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सीएनजी (CNG) और बीएस-सिक्स (BS-VI) डीजल वाली अंतरराज्यीय बसों को ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। इसके अलावा खुले में कचरा या कूड़ा जलाने पर सख्त पाबंदी है, तंदूरों में कोयला व लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक है, और निर्माण सामग्री या मलबे को ढकना अनिवार्य कर दिया गया है। सड़कों पर धूल उड़ने से रोकने के लिए मैकेनिकल सफाई और नियमित पानी का छिड़काव करने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं ताकि बढ़ते प्रदूषण पर काबू पाया जा सके।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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