दिल्ली-NCR में रिकॉर्डतोड़ गर्मी का सितम, IMD की चेतावनी ने बढ़ाई जनता की धड़कनें।
राजधानी में पारा 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान, तेज गर्म हवाओं और भीषण लू के चलते लोगों को दोपहर में घरों के अंदर रहने की सलाह।

दिल्ली में भीषण गर्मी और लू से बचने के लिए सिर-चेहरा सफेद सूती कपड़े से ढककर सड़क पर चलती एक महिला।
देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में मौसमी बदलावों के चलते जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। मैदानी इलाकों से आ रही शुष्क और अत्यंत गर्म पश्चिमी हवाओं के कारण समूचा क्षेत्र भीषण गर्मी की चपेट में आ चुका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ते पारे को देखते हुए तीव्र लू यानी हीटवेव का गंभीर अनुमान व्यक्त किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आगामी दिनों में इस क्षेत्र का अधिकतम तापमान 46 डिग्री सेल्सियस के स्तर को छू सकता है, जो सामान्य से कई डिग्री अधिक है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग ने प्रशासनिक मुस्तैदी और जनसामान्य की सुरक्षा के लिए आधिकारिक तौर पर ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। दिन के समय चलने वाली तेज थपेड़ेदार गर्म हवाओं के साथ-साथ अब रातों के तापमान में भी भारी उछाल देखा जा रहा है, जिससे नागरिकों की मुश्किलें चौगुनी हो गई हैं।
मौसम विभाग के क्षेत्रीय पूर्वानुमान केंद्र के अनुसार दिल्ली के प्राथमिक मौसम केंद्र सफदरजंग वेधशाला के अलावा नजफगढ़, मुंगेशपुर, पीतमपुरा और पालम जैसे स्वचालित मौसम केंद्रों में तापमान पहले ही सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया जा रहा है। आने वाले अड़तालीस घंटों के भीतर इन इलाकों में लू की स्थिति और अधिक आक्रामक होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वायुमंडल के निचले स्तरों पर चलने वाली उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाएं और साफ आसमान सीधे तौर पर सौर विकिरण को जमीन तक पहुंचा रहे हैं, जिससे यह इलाका एक थर्मल जोन में तब्दील हो गया है। इसके अतिरिक्त शहरीकरण के कारण कंक्रीट के ढांचे रात के समय भी ऊष्मा का उत्सर्जन कर रहे हैं, जो 'वार्म नाइट्स' यानी अत्यधिक गर्म रातों का मुख्य कारण बन रहा है। इस स्थिति में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से तीन से चार डिग्री सेल्सियस ऊपर बना हुआ है, जिससे लोगों को रात के समय भी गर्मी से कोई राहत नहीं मिल पा रही है।
स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन ने भी इस भीषण मौसमी स्थिति पर संज्ञान लिया है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने वाला यह तापमान मानव शरीर के लिए बेहद संवेदनशील साबित हो सकता है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से ही गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और हीट थकावट का खतरा सबसे अधिक बढ़ जाता है। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अस्पतालों को आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए पहले ही सतर्क कर दिया गया है। विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में लू से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए विशेष वार्ड और ओआरएस कॉर्नर स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही विभिन्न श्रम विभागों ने निर्माण स्थलों पर काम करने वाले दिहाड़ी मजदूरों के कार्य समय में बदलाव करने और दोपहर के समय सीधे धूप में काम न कराने के दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
कानूनी और आधिकारिक सुरक्षा उपायों के तहत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा निर्धारित 'हीटवेव एक्शन प्लान' को स्थानीय नगर निगमों और जिला प्रशासनों द्वारा सक्रिय कर दिया गया है। इस योजना के अंतर्गत सार्वजनिक स्थानों, बस स्टैंडों और प्रमुख बाजारों में पीने के पानी के टैंकरों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं। बिजली कंपनियों को भी निर्देश जारी किए गए हैं कि वे इस अत्यधिक मांग के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखें ताकि कूलिंग उपकरणों के बंद होने से किसी भी अप्रिय स्थिति का सामना न करना पड़े। मौसम विभाग की ओर से आम जनता के लिए जारी परामर्श में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि दोपहर बारह बजे से शाम चार बजे के बीच जब तक अत्यंत आवश्यक न हो, घरों से बाहर निकलने से बचें। बाहर निकलने की स्थिति में सिर को सफेद कपड़े, टोपी या छाते से ढक कर रखने और निरंतर अंतराल पर पानी तथा अन्य तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी गई है।
राजधानी क्षेत्र में मौसम का यह क्रूर रूप केवल एक मौसमी चक्र नहीं है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन के कारण पैदा हो रही चरम मौसमी घटनाओं की बारंबारता को भी रेखांकित करता है। दिल्ली-एनसीआर में मई के इस उत्तरार्ध में दर्ज की जा रही यह अप्रत्याशित गर्मी आने वाले दिनों में पानी की खपत और बिजली की मांग के नए रिकॉर्ड स्थापित कर सकती है। वर्तमान मौसमी परिदृश्य को देखते हुए यह स्पष्ट है कि जब तक वायुमंडलीय दशाओं में कोई बड़ा बदलाव या प्री-मानसून गतिविधियों का आगमन नहीं होता, तब तक दिल्ली और उसके आसपास के शहरों को इस जानलेवा तपन और लू के थपेड़ों से राहत मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आती है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
