देश की राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में कुदरत का दोहरा प्रहार जारी है, जिसने न केवल जमीन पर बल्कि आसमान में भी हलचल पैदा कर दी है। घने कोहरे की सफेद चादर और हड्डियों को कंपा देने वाली शीतलहर ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) के परिचालन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है। दृश्यता का स्तर शून्य के करीब पहुँच जाने के कारण विमान सेवाओं पर गहरा असर पड़ा है, जिससे हजारों यात्रियों को कड़ाके की ठंड के बीच घंटों तक हवाई अड्डे के टर्मिनलों पर फंसे रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति केवल मौसमी बदलाव नहीं है, बल्कि विमानन क्षेत्र के लिए एक बड़ी परिचालन चुनौती बनकर उभरी है, जिसने उड़ान सारणी को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।

घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी के अनुसार, सुबह के समय रनवे पर दृश्यता (Visibility) इतनी कम दर्ज की गई कि विमानों का सुरक्षित रूप से उतरना और उड़ान भरना लगभग असंभव हो गया। दिल्ली के मौसम में आए इस अचानक बदलाव ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों को प्रभावित किया है। विमानन अधिकारियों के अनुसार, दर्जनों उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा है या उनके समय में भारी बदलाव किया गया है। यात्री, जो अपने गंतव्यों के लिए समय पर पहुँचने की उम्मीद कर रहे थे, उन्हें अनिश्चित काल की देरी का सामना करना पड़ रहा है। कोहरे की इस सघनता ने एयरलाइन ऑपरेटरों को अपनी सेवाओं को पुनर्निर्धारित करने पर मजबूर कर दिया है, जिससे यात्रियों के बीच असंतोष और बेचैनी का माहौल देखा जा रहा है।

आधिकारिक और तकनीकी पक्ष की बात करें तो भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) स्थिति पर निरंतर नजर बनाए हुए हैं। CAT-III जैसी अत्याधुनिक लैंडिंग प्रणालियों के होने के बावजूद, जब दृश्यता एक निश्चित सीमा से नीचे चली जाती है, तो सुरक्षा मानकों के अनुसार उड़ानों को रोकना अनिवार्य हो जाता है। कानूनी और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत, यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पायलटों को लैंडिंग के लिए तब तक अनुमति नहीं दी जा रही है जब तक कि रनवे विजुअल रेंज (RVR) पर्याप्त न हो जाए। इसके साथ ही, विभिन्न एयरलाइंस को निर्देश दिए गए हैं कि वे यात्रियों को समय पर सूचना प्रदान करें और उनके खान-पान एवं विश्राम की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करें।

निष्कर्षतः, दिल्ली में जारी शीतलहर और कोहरे का यह संकट न केवल यात्रियों की परेशानी बढ़ा रहा है, बल्कि विमानन उद्योग के लिए भी आर्थिक बोझ का कारण बन रहा है। यह घटना दर्शाती है कि आधुनिक तकनीक के बावजूद प्रकृति का हस्तक्षेप मानवीय प्रणालियों को कितनी आसानी से पंगु बना सकता है। जब तक शीतलहर का प्रभाव कम नहीं होता और कोहरा छंटना शुरू नहीं होता, तब तक विमान सेवाओं के सामान्य होने की उम्मीद कम है। आने वाले दिनों में यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो यह संकट दिल्ली के साथ-साथ अन्य शहरों के विमान संपर्क को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

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