बेंगलुरु/हैदराबाद, 10 मार्च २०२६

दक्षिण भारत में भीषण गर्मी की दस्तक, पारा चढ़ने से बढ़ी मुश्किलें

उत्तर भारत के साथ-साथ अब दक्षिण भारत भी सूरज की तपिश से झुलसने लगा है। आमतौर पर खुशनुमा मौसम के लिए जाने जाने वाले दक्षिण भारतीय राज्यों में इस साल मार्च की शुरुआत ही काफी गर्म रही है। कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कई शहरों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर चला गया है, जिससे लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

बेंगलुरु: 'गार्डन सिटी' में 35°C की तपिश

अपनी ठंडी हवाओं और बेहतरीन मौसम के लिए मशहूर बेंगलुरु शहर अब गर्म होने लगा है। 10 मार्च को शहर का अधिकतम तापमान 35°C के आसपास दर्ज किया गया है। स्थानीय निवासियों के लिए यह काफी चौंकाने वाला है, क्योंकि मार्च के शुरुआती हफ्ते में इतनी गर्मी कम ही देखी जाती है।

बेंगलुरु में बढ़ती कंक्रीट की इमारतों और कम होते हरित क्षेत्र की वजह से 'अर्बन हीट आइलैंड' का असर साफ़ दिख रहा है। दोपहर के समय सड़कों पर आवाजाही कम हो गई है और लोग ठंडे पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि यदि यही स्थिति रही तो मार्च के अंत तक पारा 37°C को भी छू सकता है।

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में हीट अलर्ट

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आंतरिक इलाकों में गर्मी का सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इन राज्यों के कुछ जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है।

  • तेलंगाना: हैदराबाद सहित कई जिलों में तापमान 38°C से 39°C के बीच पहुंच गया है। शुष्क हवाओं के कारण दोपहर में बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे दोपहर 12 से 3 बजे के बीच सीधे धूप में जाने से बचें।
  • आंध्र प्रदेश: आंध्र के रायलसीमा क्षेत्र में गर्मी ने अपने पुराने रिकॉर्ड्स को चुनौती देना शुरू कर दिया है। यहाँ कुछ स्थानों पर पारा 40°C के करीब पहुंच रहा है। सरकार ने स्कूलों और मजदूरों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी करने पर विचार शुरू कर दिया है।


तटीय इलाकों में उमस (Humidity) की दोहरी मार

चेन्नई, विशाखापत्तनम और मंगलुरु जैसे तटीय शहरों में तापमान भले ही 33-34°C हो, लेकिन वहां की बढ़ती उमस ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। समुद्र से आने वाली नम हवाओं के कारण 'फील लाइक' टेम्परेचर (महसूस होने वाला तापमान) वास्तविक तापमान से 4-5 डिग्री ज्यादा लग रहा है। भारी उमस की वजह से लोगों को अत्यधिक पसीना और थकावट महसूस हो रही है।

क्यों बढ़ रही है गर्मी? मौसम वैज्ञानिकों की राय

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दक्षिण भारत के ऊपर एक 'एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन' बना हुआ है, जिसकी वजह से ठंडी हवाओं का प्रवेश रुक गया है। साथ ही, अल-नीनो के प्रभाव और हिंद महासागर के सतही तापमान में बढ़ोतरी भी इस समय से पहले आई गर्मी का एक बड़ा कारण मानी जा रही है। मैदानी और आंतरिक हिस्सों में बादलों की अनुपस्थिति की वजह से सोलर रेडिएशन का असर बढ़ गया है।

खेती और बिजली की मांग पर असर

बढ़ती गर्मी का सीधा असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। आंध्र और कर्नाटक में मिर्च और आम की फसलों को अधिक पानी की जरूरत पड़ रही है। वहीं, गर्मी बढ़ने के साथ ही बिजली की मांग में भी भारी उछाल आया है। शहरों में एसी और पंखों के लगातार इस्तेमाल से पावर ग्रिड पर दबाव बढ़ गया है।

स्वास्थ्य संबंधी सावधानी बरतने की अपील

डॉक्टरों ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए दक्षिण भारत के लोगों को कुछ सुझाव दिए हैं:

  • पानी का भरपूर सेवन: दिनभर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं।
  • हल्के कपड़े: सूती और ढीले कपड़े पहनें ताकि शरीर को हवा लगती रहे।
  • ओआरएस (ORS): चक्कर आने या थकावट होने पर ओआरएस के घोल का इस्तेमाल करें।
  • खान-पान: तरबूज, खीरा और दही जैसे ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करें।

दक्षिण भारत के लिए आने वाले 10-15 दिन काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल बारिश की कोई संभावना नहीं दिख रही है, जिसका मतलब है कि गर्मी और बढ़ेगी। कर्नाटक से लेकर आंध्र तक, लोगों को अब भीषण गर्मियों के लंबे दौर के लिए खुद को तैयार करना होगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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