महाराष्ट्र में इस साल मानसून की बेरुखी ने खरीफ के साथ रबी सीजन की बुवाई पर भी संकट खड़ा कर दिया है। बारिश की कमी के कारण अहिल्यानगर जिले में खेतों की नमी खत्म होने से किसानों की बुवाई प्रभावित हुई थी। इस बीच पिछले चार-पांच दिनों से जिले के कुछ हिस्सों में हो रही बारिश की बूंदों ने किसानों को राहत दी है। हालांकि, पूरे जिले में समान रूप से बारिश नहीं हुई है, लेकिन पारनेर, श्रीगोंदा और नगर तालुका क्षेत्र के किसानों को इससे काफी उम्मीदें मिली हैं। जमीन में नमी बढ़ने से चना, ज्वार और गेहूं की बुवाई का रकबा बढ़ने की संभावना है। आगामी कुछ दिनों तक बारिश का साथ मिलने पर रबी सीजन की बुवाई में तेजी आ सकती है।

इस साल जून से सितंबर के बीच अहिल्यानगर जिले में महज 295 मिमी यानी 68 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई। इस अवधि में जिले की औसत बारिश 448 मिमी थी। इस तरह पिछले वर्ष की तुलना में इस साल 153 मिमी कम बारिश हुई। औसत के मुकाबले केवल 65.9 प्रतिशत बारिश होने से खरीफ सीजन भी प्रभावित हुआ। वहीं, रबी फसलों की बुवाई के लिए जरूरी मिट्टी में नमी नहीं होने के कारण किसानों को बुवाई टालनी पड़ी। ऐसे में पिछले चार-पांच दिनों से हो रही बारिश ने जिले के कुछ क्षेत्रों में रबी की बुवाई की उम्मीद फिर से जगा दी है।

पिछले पांच दिनों में अहिल्यानगर जिले में कुल 7.1 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इसमें नगर तालुका में 22.7 मिमी, पारनेर में 11.4 मिमी, श्रीगोंदा में 38.6 मिमी, कर्जत में 3.7 मिमी, जामखेड में 1.9 मिमी, राहुरी में 2.5 मिमी, संगमनेर में 3.2 मिमी, अकोले में 7.8 मिमी, कोपरगांव में 9.1 मिमी और राहुरी में 1.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, जिले में हुई बारिश का कुल स्तर किसानों की जरूरत के लिहाज से पर्याप्त नहीं माना जा रहा है।

अहिल्यानगर जिले में कृषि विभाग ने रबी सीजन के लिए लगभग 4 लाख 63 हजार 570 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसके मुकाबले 2 नवंबर तक केवल 41 हजार 918 हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई हो सकी थी। मुख्य रूप से उन्हीं किसानों ने बुवाई की, जिनके पास कुएं, बोरवेल या अन्य जलस्रोतों के माध्यम से सिंचाई की व्यवस्था उपलब्ध थी। बारिश की कमी के कारण असिंचित यानी बारिश पर निर्भर रहने वाले क्षेत्रों में बुवाई अटकी हुई थी।

अब पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश के बाद खेतों में नमी बनने की उम्मीद है। इससे चना, ज्वार और गेहूं की बुवाई का क्षेत्र बढ़ सकता है। हालांकि, रबी सीजन की बुवाई को गति मिलने की संभावना आगामी दिनों में होने वाली बारिश पर निर्भर करेगी।

Pratahkal Newsroom

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