नई दिल्ली/चेन्नई:

मार्च 2026 के दूसरे सप्ताह में भारत के मौसम में एक अजीबोगरीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है। जहाँ एक तरफ दक्षिण भारत के कई राज्यों में बादलों की गड़गड़ाहट और बारिश की संभावना बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ देश के पश्चिमी और मध्य हिस्से भीषण गर्मी और 'हीटवेव' (Heatwave) की चपेट में आने लगे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण के राज्यों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया है, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के लिए चेतावनी जारी की है।

दक्षिण भारत: तपिश के बीच राहत की फुहारें

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में समुद्र से आने वाली नमी और हवाओं के रुख में बदलाव के कारण बारिश की अनुकूल स्थितियां बन रही हैं।

  • तमिलनाडु और केरल: IMD के अनुसार, तमिलनाडु के तटीय इलाकों और केरल के अधिकांश हिस्सों में अगले 48 घंटों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। यह बारिश स्थानीय स्तर पर बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण हो रही है।
  • कर्नाटक और आंध्र प्रदेश: तटीय कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र में भी बादलों की आवाजाही रहेगी। कुछ स्थानों पर बिजली कड़कने के साथ तेज हवाएं (30-40 किमी/घंटा) चलने का अनुमान है।

पश्चिम और मध्य भारत: हीटवेव का तांडव

दक्षिण में जहाँ बारिश की उम्मीद है, वहीं देश का एक बड़ा हिस्सा समय से पहले ही 'लू' की चपेट में है।

  • गुजरात और महाराष्ट्र: गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र के साथ-साथ महाराष्ट्र के कोंकण इलाके में तापमान सामान्य से 5-8°C तक अधिक दर्ज किया जा रहा है। मुंबई में पारा 40°C के करीब पहुँच गया है, जो मार्च के महीने में पिछले कई वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ रहा है।
  • मध्य प्रदेश और राजस्थान: यहाँ भी दिन का तापमान 38°C से 40°C के बीच बना हुआ है। IMD ने विदर्भ और पश्चिम राजस्थान के कुछ हिस्सों में हीटवेव चलने की औपचारिक घोषणा कर दी है।

गरज-चमक और बिजली से बचाव के उपाय

दक्षिण भारत में होने वाली यह प्री-मानसून बारिश अक्सर तेज बिजली कड़कने के साथ आती है। मौसम विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि:

  • गरज-चमक के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लें।
  • बिजली के उपकरणों को अनप्लग कर दें।
  • किसानों को अपनी कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

क्यों हो रहा है यह बदलाव?

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान में बंगाल की खाड़ी से उठने वाली नमी वाली हवाएं दक्षिण भारत के आंतरिक हिस्सों तक पहुँच रही हैं। वहीं, उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाओं के कारण मैदानी और पश्चिमी राज्यों में गर्मी बढ़ रही है। यह दोहरा मौसमी सिस्टम मार्च के अंत तक इसी तरह की अनिश्चितता पैदा कर सकता है।


तैयारी और सतर्कता

दक्षिण भारत के लिए यह बारिश खेती और तापमान को नियंत्रित करने के लिहाज से अच्छी खबर है, लेकिन बिजली गिरने की घटनाओं से सतर्क रहने की जरूरत है। वहीं, गर्मी वाले क्षेत्रों में लोगों को सलाह दी गई है कि वे पर्याप्त पानी पिएं और लू से बचाव के लिए जरूरी सावधानी बरतें।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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