यूट्यूबर dhruv rathee विवादों के घेरे में; पुराने फुटेज के जरिए भ्रामक जानकारी फैलाने का लगा आरोप
यूट्यूबर ध्रुव राठी पर बंगाल चुनाव के बाद मटियाब्रुज का पुराना वीडियो साझा कर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगा है, सोशल मीडिया पर जवाबदेही की मांग तेज।

कैमरे की ओर देखते हुए यूट्यूबर ध्रुव राठी की तस्वीर
Dhruv Rathee Bengal Video Controversy : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य की राजनीतिक सरगर्मी के बीच मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी एक गंभीर विवाद में फंस गए हैं। भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के कुछ ही घंटों बाद राठी द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा किए गए एक वीडियो ने इंटरनेट पर बहस छेड़ दी है। 'पश्चिम बंगाल में अच्छे दिन' शीर्षक वाले इस दो मिनट के वीडियो में राज्य में आगजनी और अशांति के दृश्यों को दिखाया गया था, जिसके माध्यम से राठी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन की समाप्ति के बाद हुए बदलावों पर कटाक्ष किया था। हालांकि, वीडियो पोस्ट होने के कुछ ही समय बाद आलोचकों और तथ्य-जांचकर्ताओं ने राठी पर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाते हुए उन्हें निशाने पर ले लिया।
मामले की गंभीरता तब बढ़ गई जब वीडियो के शुरुआती क्लिप की सत्यता पर सवाल उठाए गए। इस क्लिप में कोलकाता के मटियाब्रुज इलाके में रेलवे लाइनों के पास काले धुएं का गुबार उठता दिखाई दे रहा था, जिसे राठी ने चुनाव बाद की हिंसा के रूप में प्रस्तुत किया था। गहन विश्लेषण के बाद यह सामने आया कि यह फुटेज हालिया घटनाओं से संबंधित नहीं है, बल्कि चुनाव से काफी पहले का है। आलोचकों का तर्क है कि एक प्रभावशाली व्यक्तित्व होने के नाते राठी को वीडियो साझा करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करनी चाहिए थी, क्योंकि इस तरह के संवेदनशील समय में गलत जानकारी सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ सकती है।
कानूनी और आधिकारिक दृष्टिकोण से देखें तो चुनाव बाद की संवेदनशीलता के बीच आईटी नियमों और भ्रामक सामग्री के प्रसार को लेकर सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। डिजिटल स्पेस में फेक न्यूज और मिसइन्फॉर्मेशन के विरुद्ध बढ़ते दबाव के कारण इस घटना ने एक नया मोड़ ले लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने दृश्यों को नए संदर्भ में पेश करना न केवल पत्रकारिता के मूल्यों के विरुद्ध है, बल्कि यह कानूनी रूप से भी चुनौती का कारण बन सकता है। फिलहाल, सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर ध्रुव राठी की कड़ी आलोचना हो रही है और यूजर्स उनसे जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
The government is yet to take oath, and fraud @dhruv_rathee has already started spreading fake news about Bengal.The very first video in his post about Bengal is fake. He claimed that the fire was caused by BJP workers after the election results.In reality, the video is from… pic.twitter.com/VqAklOlzzs— Facts (@BefittingFacts) May 7, 2026
यह घटना इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि डिजिटल युग में सूचनाओं का सत्यापन कितना अनिवार्य है। जब राजनीतिक माहौल पहले से ही तनावपूर्ण हो, तब बिना जांचे-परखे साझा की गई सामग्री न केवल एक व्यक्ति की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक विमर्श को प्रभावित करती है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज की जाती है या ध्रुव राठी अपनी इस त्रुटि पर कोई स्पष्टीकरण जारी करते हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
