उत्तर भारत में पड़ रही तेज़ गर्मी के बीच वृंदावन के ऐतिहासिक बांके बिहारी मंदिर क्षेत्र की संकरी गलियों में श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब देखने को मिला है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मंदिर के बाहर और आसपास की गलियों में भारी भीड़ साफ दिखाई देती है, जिसने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएँ खड़ी कर दी हैं। मौसम विभाग द्वारा 30 मई को लगभग 41 डिग्री सेल्सियस तापमान की चेतावनी के बीच यह भीड़ और अधिक चर्चा का विषय बन गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वृंदावन स्थित इस प्रमुख धार्मिक स्थल पर प्रतिदिन लगभग 40,000 से 50,000 श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इतनी बड़ी संख्या में भीड़ के कारण संकरी और प्राचीन गलियों पर अत्यधिक दबाव बन जाता है, जिससे कई बार अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। पिछले वर्षों में भी इस क्षेत्र में गंभीर घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जिनमें हृदयाघात के मामले और वर्ष 2022 में हुई एक भगदड़ शामिल है, जिसमें दो लोगों की मृत्यु हो गई थी।



इसी पृष्ठभूमि में बांके बिहारी कॉरिडोर परियोजना को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। यह प्रस्तावित परियोजना वृंदावन के भीड़भाड़ वाले मंदिर क्षेत्र में प्रवेश और निकास व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने, पैदल मार्गों को चौड़ा करने, पार्किंग और होल्डिंग एरिया विकसित करने तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाई गई है। रिपोर्टों के अनुसार, इस परियोजना को सुप्रीम कोर्ट से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन भूमि अधिग्रहण और संपत्ति संबंधी विवादों के कारण इसका क्रियान्वयन फिलहाल अटका हुआ है।

दूसरी ओर, इस परियोजना का विरोध गोस्वामी सेवायत समुदाय द्वारा किया जा रहा है, जो सदियों से बांके बिहारी मंदिर की परंपरागत व्यवस्था और सेवाओं का संचालन करते आए हैं। उनका कहना है कि प्रस्तावित कॉरिडोर के चलते न केवल उनके पारिवारिक आवास और ऐतिहासिक संपत्तियाँ प्रभावित हो सकती हैं, बल्कि मंदिर प्रबंधन में उनका पारंपरिक अधिकार भी कमजोर पड़ सकता है। उनका यह भी आरोप है कि नई व्यवस्था से मंदिर का नियंत्रण सरकारी तंत्र की ओर स्थानांतरित हो सकता है, जिससे सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं में परिवर्तन आने की आशंका है।

इसके साथ ही गोस्वामियों का यह भी तर्क है कि वृंदावन की संकरी गलियाँ केवल भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि उसकी आध्यात्मिक पहचान का हिस्सा हैं। उनका मानना है कि इन गलियों का स्वरूप बदलने से तीर्थस्थल का पारंपरिक स्वरूप और आध्यात्मिक वातावरण प्रभावित हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, कॉरिडोर के समर्थकों का कहना है कि बढ़ती भीड़ और लगातार होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए आधुनिक प्रबंधन और सुरक्षित संरचना समय की आवश्यकता है, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाया जा सके।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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