कॉरपोरेट की नई 'टॉक्सिक' नीति? 1 मिनट ज्यादा लंच करने पर 1 घंटे की मिलेगी अनपेड सजा
कंटेंट क्रिएटर द्वारा पोस्ट किए गए एक काल्पनिक दंडात्मक कार्यालय मेमो के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद कामकाजी पेशेवरों में नाराजगी देखी गई।

लंच करते कर्मचारियों की पृष्ठभूमि पर प्रतीक शेट्टी द्वारा तैयार किया गया वह व्यंग्यात्मक डिजिटल मेमो दिख रहा है, जिसमें अतिरिक्त लंच ब्रेक के बदले बिना भुगतान के अतिरिक्त काम करने की बात लिखी गई है।
toxic work culture debate India : एक कथित कॉरपोरेट कंपनी के 'लंच ब्रेक' से जुड़े कथित आधिकारिक मेमो ने सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिसने आधुनिक कार्यस्थलों में कर्मचारियों के मानसिक तनाव और काम के घंटों को लेकर चल रही बहस को फिर से गरमा दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक मेमो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें प्रबंधन की ओर से कर्मचारियों के तीस मिनट से अधिक लंबे लंच ब्रेक पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की बात कही गई थी। इस पोस्ट के सामने आते ही हजारों कामकाजी पेशेवरों ने इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं, जिससे इंटरनेट पर जहरीली कार्य संस्कृति (टॉक्सिक वर्क कल्चर) के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
पैरोडी पोस्ट से भड़का कॉरपोरेट का गुस्सा : मेमो की अजीबोगरीब शर्तें
इस पूरे विवाद की शुरुआत कंटेंट क्रिएटर प्रतीक शेट्टी द्वारा लिंक्डइन पर पोस्ट की गई एक व्यंग्यात्मक (सैटायर) तस्वीर से हुई, जो साल 2025 के एक काल्पनिक मेमो के रूप में तैयार की गई थी। इसके बाद एडवोकेट नलिनी उनागर ने इसे एक्स प्लेटफॉर्म पर साझा किया, जिसके बाद यह देखते ही देखते वायरल हो गया। इस कथित नीति में कहा गया था कि यदि कोई कर्मचारी तीस मिनट की तय समय-सीमा से एक भी मिनट ऊपर लंच ब्रेक लेता है, तो उसे शाम छह बजे के बाद बिना किसी भुगतान के अतिरिक्त समय (अनपेड ओवरटाइम) काम करना होगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी का लंच ब्रेक इकतीस मिनट का होता है, तो उसे अपनी शिफ्ट खत्म होने के बाद जबरन शाम सात बजे तक रुकना पड़ेगा। इस मेमो को सच मानकर हजारों लोगों ने कॉरपोरेट शोषण, खराब नौकरियों को छोड़ने के अपने अनुभवों और 'हसल कल्चर' के नाम पर होने वाले उत्पीड़न पर जमकर भड़ास निकाली, हालांकि कुछ लोगों ने भारत में कार्यकुशलता में सुधार के लिए ऐसे कड़े नियमों को सही भी ठहराया।
कानूनी और नैतिक पहलू : अनपेड ओवरटाइम और श्रम कानूनों का उल्लंघन
भले ही यह पूरा मामला प्रतीक शेट्टी के सैटायर अकाउंट से उपजा एक मजाक यानी पैरोडी था, लेकिन इसने वास्तविक कार्यस्थलों में होने वाले अवैध नीतिगत बदलावों और श्रम कानूनों के उल्लंघन से जुड़े गंभीर नैतिक और कानूनी पहलुओं को सतह पर ला दिया है। कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, कर्मचारियों को बिना किसी अतिरिक्त पारिश्रमिक के जबरन काम के घंटों के बाद रोकना पूरी तरह से अवैध और स्थापित श्रम नियमावलियों के खिलाफ है। इस फर्जी नीति ने कॉरपोरेट जगत में वास्तविक रूप से लागू होने वाले उन अनुचित दंडों की ओर ध्यान आकर्षित किया है, जहां कर्मचारियों के बुनियादी अधिकारों और विश्राम के समय को प्रशासनिक दबाव के जरिए छीनने का प्रयास किया जाता है, जो पूरी तरह से गैर-कानूनी कृत्य की श्रेणी में आता है।
If your management writes policies like this, don't be surprised when your best employees write resignation emails. pic.twitter.com/3v5jZGA3XS
— Nalini Unagar (@NalinisKitchen) June 22, 2026
ब्रेन ड्रेन और भविष्य की कार्य संस्कृति पर गहरा प्रभाव :
इस वायरल पैरोडी ने भले ही शुरुआत एक मज़ाक के रूप में की हो, लेकिन इसके पीछे छिपी जनभावना ने भारतीय कॉरपोरेट जगत के एक कड़वे सच को उजागर किया है। काम के अत्यधिक दबाव और अस्वस्थ कामकाजी माहौल के कारण युवाओं में बढ़ता असंतोष देश के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है। इस घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि कार्यस्थलों पर दंडात्मक नीतियों और मानसिक उत्पीड़न के कारण भारत की कुशल प्रतिभाएं बेहतर कार्य संस्कृति और संतुलित जीवन की तलाश में विदेशों का रुख कर रही हैं, जिससे देश में 'ब्रेन ड्रेन' की समस्या और गंभीर हो सकती है। यह विवाद नियोक्ताओं के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है कि उत्पादकता बढ़ाने के लिए दंडात्मक रवैये के बजाय एक स्वस्थ और सहयोगात्मक माहौल तैयार करना ही दीर्घकालिक समाधान है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
