केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह दौरे की तस्वीरों पर कांग्रेस ने राहुल गांधी के पुराने दौरे की नकल करने का आरोप लगाया है।


Kiren Rijiju Andaman Nicobar official visit boat trip : भारत के सुदूर और सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की शांत लहरों के बीच इस समय एक बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो गया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के तीन दिवसीय अंडमान दौरे और उनकी एक 'बोट ट्रिप' को लेकर भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच तीखे कूटनीतिक और जुबानी तीर चलने शुरू हो गए हैं। इस घटनाक्रम ने देश के दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे के विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे गंभीर मुद्दों को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।

इस प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल के मुख्य घटनाक्रम पर नजर डालें तो केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू 19 जून से 21 जून तक अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री सरकार के जनसंपर्क कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं, द्वीप समूह में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के भव्य आयोजनों में शामिल हो रहे हैं। इस दौरे के बीच रिजिजू ने इस दूरस्थ द्वीप समूह में हुए बुनियादी ढांचे के अभूतपूर्व लाभों, विशेष रूप से नए सी-पोर्ट टर्मिनलों (समुद्री बंदरगाह टर्मिनलों) के निर्माण को रेखांकित करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने दूरदराज के इस द्वीप क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक विकास का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को दिया।

केंद्रीय मंत्री के इस विजुअल पोस्ट के सार्वजनिक होते ही विपक्षी दल कांग्रेस पूरी तरह आक्रामक हो गई और उसने इसे एक राजनीतिक नकल करार दिया। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत सहित कई दिग्गज नेताओं ने किरेन रिजिजू के इस बोट सफर पर तंज कसते हुए इसे राहुल गांधी के पूर्व दौरे की एक कमजोर नकल बताया। गौरतलब है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अप्रैल 2026 में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का एक बेहद चर्चित दौरा किया था, जहां उन्होंने स्थानीय लोगों से घुलने-मिलने के लिए स्कूटर की सवारी की थी, समुद्र में स्नॉर्कलिंग की थी और मछुआरों व स्थानीय जनजातियों से मुलाकात की थी। कांग्रेस का दावा है कि भाजपा सरकार विपक्षी नेताओं के जनसंपर्क के तरीकों की नकल कर रही है।

इस राजनीतिक विवाद का एक और गंभीर नीतिगत पहलू तब सामने आया जब कांग्रेस ने राहुल गांधी के उस बयान को दोबारा हवा दी, जिसमें उन्होंने सरकार के महत्वाकांक्षी 'ग्रेट निकोबार डेवलपमेंट प्रोजेक्ट' (बृहत निकोबार विकास परियोजना) पर तीखा हमला बोला था। विपक्ष ने इस विशालकाय परियोजना को एक बड़ा घोटाला बताते हुए आरोप लगाया है कि इसके जरिए द्वीप समूह के प्राचीन वनों, अद्वितीय जैव विविधता और वहां की मूल संवेदनशील जनजातियों के अस्तित्व को भारी विधिक और पर्यावरणीय खतरा पैदा हो रहा है। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों और आधिकारिक सूत्रों ने कांग्रेस के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे महज एक हताश राजनीतिक पैंतरा बताया है और साफ किया है कि देश की सुरक्षा और कनेक्टिविटी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

इस पूरे वीआईपी राजनीतिक ड्रामे के बीच अंडमान के स्थानीय निवासियों की एक बेहद व्यावहारिक और जमीनी समस्या भी उजागर हुई है, जिसने इस विवाद को एक नया सामाजिक आयाम दे दिया है। स्थानीय नागरिकों और द्वीपवासियों ने शिकायत की है कि जहां एक तरफ राजनेताओं और वीआईपी अधिकारियों के लिए अत्याधुनिक और सुरक्षित नावों की व्यवस्था की जाती है, वहीं आम जनता को आज भी जंग लगी, पुरानी और बेहद असुरक्षित पब्लिक फेरियों (सार्वजनिक नौकाओं) में सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। अंततः, किरेन रिजिजू के इस दौरे से उपजा यह विवाद यह साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में अंडमान और निकोबार जैसी सामरिक चौकियों पर होने वाला विकास केवल प्रशासनिक फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह आगामी राष्ट्रीय विमर्श और पर्यावरण कूटनीति का एक बड़ा कुरुक्षेत्र बनने जा रहा है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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