शर्मनाक! BSF की वर्दी का 'तमाशा'? जीप में बैठे एक्टर्स के लिए जवानों की परेड देख भड़का देश!
जैसलमेर के ऐतिहासिक लोंगेवाला बॉर्डर पर 'बॉर्डर 2' की कास्ट का BSF द्वारा भव्य स्वागत किया गया। सनी देओल, वरुण धवन और दिलजीत दोसांझ के साथ जवानों के डांस वीडियो ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। जहाँ कुछ इसे मनोबल बढ़ाने वाला बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे सैनिकों का 'व्यावसायिक उपयोग' कह रहे हैं। पढ़िए इस विवाद और आयोजन की पूरी रिपोर्ट।

जैसलमेर: 1971 के ऐतिहासिक युद्ध का गवाह रहा लोंगेवाला-तनोट बॉर्डर एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई युद्ध नहीं, बल्कि सिनेमा और सेना का मिलन है। आगामी फिल्म 'बॉर्डर 2' (Border 2) की स्टार कास्ट के स्वागत में सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा आयोजित समारोह ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। जैसलमेर के रेगिस्तान में जहाँ एक तरफ देशभक्ति के गीतों और सितारों के साथ थिरकते जवानों की तस्वीरें वायरल हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ नेटिजन्स का एक वर्ग इसे वर्दी के सम्मान से जोड़कर तीखे सवाल पूछ रहा है।
रेगिस्तान में गूंजा 'घर कब आओगे': क्या हुआ उस दिन?
घटनाक्रम के अनुसार, फिल्म 'बॉर्डर 2' के मुख्य कलाकार सनी देओल, वरुण धवन और दिलजीत दोसांझ अपनी फिल्म के बहुप्रतीक्षित गीत 'घर कब आओगे' (Ghar Kab Aaoge) के रीमेक को लॉन्च करने के लिए लोंगेवाला पोस्ट पहुंचे थे। यह वही स्थान है जहाँ 1971 में मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी के नेतृत्व में भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस का परिचय दिया था।
बीएसएफ जवानों ने सितारों का औपचारिक और गर्मजोशी से स्वागत किया। समारोह के दौरान निम्नलिखित दृश्य देखने को मिले:
- जवानों का उत्साह: रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीएसएफ के जवान फिल्मी सितारों के साथ नाचते और गाते नजर आए।
- मनोबल या मनोरंजन: माहौल पूरी तरह से उत्सव जैसा था, जहाँ सनी देओल अपने पुराने 'बॉर्डर' अवतार की याद दिला रहे थे, वहीं दिलजीत और वरुण ने जवानों के साथ कदम से कदम मिलाए।
- ऐतिहासिक जुड़ाव: इस कार्यक्रम का उद्देश्य जवानों का मनोबल बढ़ाना और बीएसएफ की वीरता को सिनेमाई पर्दे पर फिर से जीवंत करना बताया गया।
सोशल मीडिया पर दो फाड़ हुई राय: सम्मान बनाम प्रॉप्स
जैसे ही इस आयोजन की तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर सामने आए, जनता की राय दो धड़ों में बंट गई।
आलोचकों का पक्ष: एक वर्ग ने वर्दीधारी सैनिकों को फिल्म के प्रचार का हिस्सा बनाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि:
- सैनिकों को फिल्म के 'प्रॉप्स' (Props) की तरह इस्तेमाल करना उनकी गरिमा के खिलाफ है।
- रक्षा बलों का उपयोग व्यावसायिक फिल्म के प्रचार के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
समर्थकों और अधिकारियों का पक्ष: दूसरी ओर, कई लोगों ने और रक्षा विशेषज्ञों ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया है। उनके तर्क हैं:
- यह 'Esprit de corps' (समूह भावना) और जवानों के मनोबल को बढ़ाने का एक तरीका है।
- गणमान्य व्यक्तियों या मशहूर हस्तियों के आने पर औपचारिक स्वागत (Standard Protocol) एक परंपरा रही है।
- ऐसी फिल्में युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करती हैं, इसलिए इसे सह-मेजबानी के तौर पर देखा जाना चाहिए।
लोंगेवाला में हुआ यह आयोजन निश्चित रूप से 'बॉर्डर 2' के लिए एक बड़ा पब्लिसिटी स्टंट साबित हुआ है, लेकिन इसने सेना और मनोरंजन जगत के बीच की मर्यादा रेखा पर एक गंभीर विमर्श भी शुरू कर दिया है। जहाँ प्रशंसक इसे अपने नायकों (रील और रियल दोनों) को एक साथ देखकर खुश हैं, वहीं आलोचक संस्थागत गरिमा को सर्वोपरि रखने की वकालत कर रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म की रिलीज तक यह विवाद क्या रूप लेता है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
