'Cadaver' पर मज़ाक बनाकर फंसीं सेजल पवार ; वीडियो वायरल होते ही कही ये बात...
कॉमेडियन प्रणीत मोरे के शो से जुड़ा एक और वीडियो वायरल हो गया, जिसमें मेडिकल छात्रा सेजल पवार द्वारा कैडवर पर की गई टिप्पणी ने नया विवाद खड़ा कर दिया। शवदान, मेडिकल नैतिकता, पेशेवर आचरण और सोशल मीडिया जवाबदेही को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई, जबकि पवार ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगकर विवाद पर प्रतिक्रिया दी।

कॉमेडियन प्रणीत मोरे के शो में सेजल पवार की कैडवर टिप्पणी पर विवाद
देशभर में हाल ही में ₹370 बिरयानी विवाद को लेकर छिड़ी बहस अभी थमी भी नहीं थी कि कॉमेडियन प्रणीत मोरे के एक अन्य क्राउड-वर्क शो से सामने आए वीडियो ने सोशल मीडिया पर नया विवाद खड़ा कर दिया। इस बार विवाद के केंद्र में मुंबई की मेडिकल छात्रा और डॉक्टर बताई जा रही सेजल पवार हैं, जिनके एक बयान ने चिकित्सा नैतिकता, शवदान और पेशेवर आचरण को लेकर व्यापक चर्चा छेड़ दी है।
कुछ ही दिन पहले प्रणीत मोरे के शो में गुरुग्राम निवासी हिमांशु जांगड़ा का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने एक महिला के लिए ₹370 की चिकन बिरयानी खरीदी थी और इसके बदले वह किसी प्रकार की शारीरिक निकटता की उम्मीद कर रहे थे। वीडियो में उनका कथन “₹370 लगे हैं, वसूल तो करूंगा” सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। बड़ी संख्या में लोगों ने इस टिप्पणी को महिलाओं के प्रति अधिकारवादी सोच और सहमति को पैसों के बदले हासिल किए जाने वाली मानसिकता के रूप में देखा।
इस विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर सहमति, डेटिंग संस्कृति और महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण को लेकर बहस छेड़ दी थी। आलोचकों का कहना था कि किसी व्यक्ति के लिए भोजन या अन्य खर्च करना उसे किसी प्रकार की शारीरिक या भावनात्मक अपेक्षा का अधिकार नहीं देता। मामला तब और गंभीर हो गया जब चर्चाओं में यह दावा सामने आया कि महिला द्वारा कथित रूप से मना करने के बाद भी दबाव बनाने की बात कही गई थी। विवाद बढ़ने के बाद हिमांशु जांगड़ा को सोशल मीडिया पर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा और उनकी गुरुग्राम स्थित कंपनी ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। इसके बाद उनके सोशल मीडिया अकाउंट भी निष्क्रिय बताए गए।
Sejal pawar doctor by profession talking about how she and her friends make fun of dead bodies about their dick size and made several nasty comments about male reproductive organ pic.twitter.com/q7rfQoi6DJ
— Aarohi (@hamlakroo) June 10, 2026
इसी विवाद के कुछ दिनों बाद प्रणीत मोरे के एक अन्य शो का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में मुंबई की मेडिकल छात्रा सेजल पवार मंच पर दर्शकों के साथ बातचीत करती दिखाई दीं। बातचीत की शुरुआत तब हुई जब प्रणीत मोरे ने उनसे पूछा कि पोस्टमॉर्टम या मेडिकल शिक्षा के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले शवों के साथ काम करते समय डॉक्टर हमेशा गंभीर रहते हैं या फिर कभी-कभी हास्य भी माहौल का हिस्सा बन जाता है।
इस प्रश्न के जवाब में सेजल पवार ने मेडिकल प्रशिक्षण के दौरान इस्तेमाल होने वाले कैडवर यानी मानव शवों से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वह और उनके कुछ साथी पुरुष कैडवर के निजी अंगों के आकार की तुलना करते हुए मजाक किया करते थे। यह टिप्पणी सामने आते ही वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया और लोगों ने इसे शवदान करने वाले व्यक्तियों के प्रति अपमानजनक और असंवेदनशील बताया।
आलोचकों का कहना था कि मेडिकल शिक्षा के लिए दान किए गए शव केवल अध्ययन की सामग्री नहीं होते, बल्कि उन्हें भावी डॉक्टरों के “पहले शिक्षक” के रूप में देखा जाता है। ऐसे में उनके बारे में मजाक करना चिकित्सा पेशे की मूल नैतिकता के खिलाफ माना गया। कई लोगों ने यह भी आशंका जताई कि इस तरह की टिप्पणियां भविष्य में लोगों को शवदान के लिए प्रेरित करने के बजाय हतोत्साहित कर सकती हैं।
विवाद बढ़ने के साथ ही चिकित्सा समुदाय के कई सदस्यों ने भी प्रतिक्रिया दी। डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों ने कहा कि कैडवर के प्रति सम्मान मेडिकल शिक्षा का मूल सिद्धांत है और यह सम्मान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं होना चाहिए। सोशल मीडिया पर एक मेडिकल छात्र ने लिखा कि मेडिकल प्रशिक्षण के दौरान कैडवर का मजाक उड़ाना सबसे अनुचित कार्यों में से एक माना जाता है।
जैसे-जैसे विवाद बढ़ता गया, सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसकी तुलना हालिया ₹370 बिरयानी विवाद से भी करनी शुरू कर दी। लोगों का कहना था कि दोनों मामलों ने अलग-अलग संदर्भों में समाज और पेशेवर समुदायों की संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और सार्वजनिक व्यवहार को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
Nice victim card Necrophile degenerate pic.twitter.com/6CYm2pT09X
— Hindutva Knight (@HPhobiaWatch) June 11, 2026
Removed DP, removed all posts, unfollowed almost everyone, made her account private https://t.co/rffZE9Jg3q pic.twitter.com/FROvsXj2HL
— Hindutva Knight (@HPhobiaWatch) June 11, 2026
लगातार बढ़ती आलोचनाओं के बीच सेजल पवार ने इंस्टाग्राम पर सार्वजनिक माफी जारी की। अपने बयान में उन्होंने कहा कि वह अपने शब्दों का बचाव नहीं करना चाहतीं और पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करती हैं। उन्होंने माना कि उनकी बातों को उस रूप में समझा गया, जिसकी उन्होंने कल्पना नहीं की थी, और यदि उनके बयान से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए खेद व्यक्त करती हैं। माफी जारी करने के कुछ समय बाद उन्होंने अपना सोशल मीडिया अकाउंट निजी कर लिया।
इस घटना के बाद कई लोगों ने संबंधित शैक्षणिक संस्थान से मामले की जांच की मांग की, जबकि कुछ लोगों का मानना था कि यदि माफी ईमानदारी से दी गई है तो उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। हालांकि, इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक मंचों पर पेशेवरों की जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए और समाज किन मूल्यों को लेकर सबसे अधिक संवेदनशील है।
₹370 बिरयानी विवाद और उसके तुरंत बाद सामने आए कैडवर टिप्पणी विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया के दौर में सार्वजनिक मंचों पर कही गई बातें केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहतीं। वे सामाजिक नैतिकता, पेशेवर जिम्मेदारी और सार्वजनिक विश्वास से जुड़े बड़े विमर्श का हिस्सा बन जाती हैं। यही कारण है कि इन दोनों घटनाओं ने देशभर में व्यापक चर्चा को जन्म दिया और संवेदनशील विषयों पर जिम्मेदार संवाद की आवश्यकता को फिर से केंद्र में ला खड़ा किया।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
