उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक ऐसी दुर्लभ और चौंकाने वाली चिकित्सा घटना सामने आई है, जिसने चिकित्सा जगत से लेकर आम लोगों तक सभी को हैरान कर दिया है। अमीना नामक महिला ने एक अत्यंत असामान्य स्थिति में चार शिशुओं- जुड़वां से भी अधिक यानी क्वाड्रुप्लेट्स को पाँच दिनों के अंतराल में जन्म दिया, जिसे डॉक्टरों ने एक बेहद दुर्लभ और उच्च जोखिम वाला मामला बताया है।

यह घटना उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित टीएमयू अस्पताल में सामने आई, जहाँ अमीना ने 9 मई को अपने पहले नवजात शिशु को जन्म दिया। यह शिशु, एक बालक, अत्यंत कम वजन लगभग 710 ग्राम का था और समय से पूर्व जन्म के कारण उसकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई थी। इसके बाद, 14 मई को अमीना ने तीन अन्य शिशुओं दो बालकों और एक बालिका को जन्म दिया। सभी प्रसव सामान्य (वजाइनल डिलीवरी) के माध्यम से हुए, बिना सिजेरियन ऑपरेशन के, जो इस मामले को और भी असाधारण बनाता है।



चिकित्सकों के अनुसार यह गर्भावस्था पहले से ही उच्च जोखिम वाली थी, जिसमें लगातार निगरानी और विशेष चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता थी। जन्म के बाद सभी नवजातों को गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में रखा गया, जहाँ उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी गई। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, एक शिशु अपेक्षाकृत स्थिर था और उसे फीडिंग सपोर्ट दिया जा रहा था, जबकि अन्य दो शिशुओं को विशेष चिकित्सा सहायता की आवश्यकता बनी हुई थी।

हालाँकि, इस संवेदनशील और जटिल चिकित्सा मामले में एक दुखद मोड़ भी आया, जब पहले जन्मे नवजात शिशु की मृत्यु हो गई। अस्पताल प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार, अत्यंत कम वजन और समय से पूर्व जन्म के कारण शिशु की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई थी और तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों का कहना है कि क्वाड्रुप्लेट्स गर्भावस्था स्वयं में ही अत्यंत दुर्लभ होती है, और ऐसे में सभी शिशुओं का प्राकृतिक प्रसव के माध्यम से जन्म लेना चिकित्सा दृष्टि से और भी असामान्य है। पाँच दिनों में अलग-अलग चरणों में प्रसव होना इस मामले को चिकित्सकीय इतिहास में एक विशेष उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

इस पूरी घटना में जहाँ एक ओर चिकित्सा विशेषज्ञ इसे जटिल प्रसव प्रबंधन की उपलब्धि मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नवजात की मृत्यु ने परिवार और चिकित्सकीय टीम के लिए गहरा दुख उत्पन्न किया है। अमीना की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है और वह अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं, जबकि शेष नवजातों का उपचार NICU में जारी है। यह मामला न केवल चिकित्सा विज्ञान के लिए एक दुर्लभ अध्ययन का विषय बन गया है, बल्कि उच्च जोखिम गर्भावस्था में सावधानी, संसाधनों और विशेषज्ञ देखभाल की आवश्यकता को भी उजागर करता है।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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