उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में तिरंगे के रिबन का सम्मान कर पेश की मिसाल
श्रीनगर में उमर अब्दुल्ला ने तिरंगे के रिबन को काटने के बजाय खोलकर जीता दिल। भारतीय ध्वज संहिता का पालन कर पेश की देशभक्ति की अनूठी मिसाल। पूरी खबर पढ़ें।

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (मध्य)
Omar Abdullah Srinagar event tricolour ribbon : जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान बुधवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने न केवल वहां मौजूद जनसमूह का दिल जीत लिया, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की एक नई परिभाषा भी स्थापित कर दी। नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता उमर अब्दुल्ला ने एक उद्घाटन समारोह के दौरान तिरंगे के रंगों वाले रिबन को कैंची से काटने के बजाय उसे हाथों से खोलकर (Untie) भारतीय ध्वज संहिता के प्रति अपनी गहरी निष्ठा प्रदर्शित की। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है, जिसमें अब्दुल्ला की त्वरित सूझबूझ और राष्ट्रध्वज के प्रति उनके सम्मान की चहुंओर प्रशंसा हो रही है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे उमर अब्दुल्ला जब उद्घाटन के लिए आगे बढ़े, तो उन्होंने देखा कि आयोजकों ने केसरिया, सफेद और हरे रंग के रिबन का उपयोग किया है। जैसे ही उन्हें कैंची थमाई गई, उन्होंने भारतीय ध्वज संहिता (Flag Code of India) की मर्यादा का ध्यान रखते हुए रिबन को बीच से काटने से इनकार कर दिया। उन्होंने आयोजकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राष्ट्रीय प्रतीकों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस धागे का विरूपण (Mutilation) नहीं होना चाहिए। इसके बाद, उन्होंने अत्यंत सावधानी और सम्मान के साथ रिबन की गांठ को खोला, उसे करीने से तय किया और आयोजकों को वापस सौंप दिया। उनके इस सरल लेकिन प्रभावशाली कदम ने औपचारिक उद्घाटन को एक गरिमामय क्षण में बदल दिया।
कानूनी और आधिकारिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो 'भारतीय ध्वज संहिता, 2002' और 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971' स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय ध्वज या उसके प्रतीकों के किसी भी प्रकार के अपमान, विरूपण या उसे जलाने/काटने को प्रतिबंधित करते हैं। उमर अब्दुल्ला के इस कदम को विशेषज्ञों ने कानून की सूक्ष्म समझ और एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के कर्तव्य के रूप में देखा है। पीटीआई और ग्रेटर कश्मीर जैसी प्रमुख मीडिया एजेंसियों ने उनके इस व्यवहार को 'क्विक थिंकिंग' और अटूट देशभक्ति का उदाहरण बताया है। पारंपरिक परिधान में सजे अब्दुल्ला ने जिस सहजता के साथ इस संवेदनशील स्थिति को संभाला, उसने हस्तशिल्प प्रदर्शनी स्थल पर मौजूद भीड़ को भी राष्ट्र के प्रति गौरव की अनुभूति कराई।
#WATCH | Srinagar | Jammu & Kashmir CM Omar Abdullah refuses to cut a tricoloured inaugural ribbon to mark the official opening of the two-day Handicrafts & Handloom Exhibition, instead asks the organisers to remove it and keep it safely pic.twitter.com/d2o6kYzKH2
— ANI (@ANI) April 15, 2026
इस घटना का महत्व केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक जीवन में प्रतीकों की अहमियत को रेखांकित करता है। श्रीनगर की धरती से दिया गया यह संदेश कि राष्ट्रीय गौरव के प्रतीकों की रक्षा हर नागरिक का परम धर्म है, एक व्यापक प्रभाव डाल रहा है। सोशल मीडिया पर यूजर्स इसे 'फ्लैग रिस्पेक्ट' का एक अनुकरणीय उदाहरण बता रहे हैं। अंततः, उमर अब्दुल्ला की यह पहल यह सिद्ध करती है कि राष्ट्रवाद केवल नारों में नहीं, बल्कि उन छोटे-छोटे व्यवहारों और सजगताओं में बसता है जो हम सार्वजनिक मंचों पर प्रदर्शित करते हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
