क्यों 'कॉपीराइट स्ट्राइक' को लेकर भिड़े इन्फ्लुएंसर निशु तिवारी और यूट्यूबर ठगेश? क्या महेश चवन को भारी पड़ेगी रोस्टिंग?
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर निशु तिवारी और मशहूर यूट्यूबर ठगेश के बीच 'कॉपीराइट स्ट्राइक' को लेकर छिड़ा विवाद अब एक बड़ी डिजिटल जंग बन चुका है। जानें कैसे एक रोस्ट वीडियो ने 'कंटेंट चोरी' और 'अभिव्यक्ति की आजादी' की बहस को जन्म दिया और क्यों आमने-सामने हैं रील मेकर्स और रोस्टर्स की सेनाएं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

नई दिल्ली: सोशल मीडिया की रंगीन दुनिया में अक्सर हंसी-मजाक और मनोरंजन के पीछे गंभीर कानूनी और तकनीकी युद्ध छिड़े होते हैं। हाल ही में डिजिटल जगत का एक ऐसा ही विवाद सुर्खियों में है, जिसने 'कंटेंट क्रिएटर बनाम रोस्टर' की बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। उत्तर प्रदेश की मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर निशु तिवारी और चर्चित यूट्यूबर महेश चवन, जिन्हें दुनिया 'ठगेश' के नाम से जानती है, के बीच छिड़ा यह विवाद अब महज एक निजी झगड़ा न रहकर इंटरनेट की आचार संहिता और अधिकारों की लड़ाई बन चुका है।
इस विवाद की पटकथा तब लिखी गई जब अपने तीखे कटाक्ष और 'ठगेश शो' के लिए मशहूर महेश चवन ने अपने एक वीडियो में निशु तिवारी के कंटेंट को रोस्ट किया। ठगेश का अंदाज हमेशा की तरह मजाकिया था, लेकिन यह हास्य जल्द ही विवाद की भेंट चढ़ गया। जैसे ही वीडियो सार्वजनिक हुआ, निशु तिवारी की टीम की ओर से उस पर 'कॉपीराइट स्ट्राइक' भेज दी गई। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक स्ट्राइक किसी भी क्रिएटर की मेहनत और चैनल की साख के लिए बड़ा खतरा मानी जाती है, और यहीं से दोनों दिग्गजों के बीच सीधी जंग शुरू हो गई।
ठगेश ने इस स्ट्राइक को सीधे तौर पर अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला करार दिया। उन्होंने अपने व्लॉग्स के जरिए जनता के सामने अपना पक्ष रखते हुए आरोप लगाया कि निशु तिवारी उन्हें जानबूझकर निशाना बना रही हैं और रोस्टिंग जैसे स्वस्थ मनोरंजन के मार्ग में बाधा उत्पन्न कर रही हैं। दूसरी ओर, निशु तिवारी के खेमे का तर्क स्पष्ट है कि कंटेंट क्रिएशन में उनकी अपनी मेहनत और मौलिकता है, जिसका गलत इस्तेमाल या उपहास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार, कॉपीराइट स्ट्राइक उनके बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा का एक कानूनी जरिया है।
देखते ही देखते यह विवाद सोशल मीडिया के गलियारों से निकलकर फैंस की वैचारिक जंग में तब्दील हो गया। जहां एक ओर ठगेश के समर्थक इसे क्रिएटिव फ्रीडम के खिलाफ बता रहे हैं, वहीं निशु के प्रशंसकों का मानना है कि किसी के काम का मजाक उड़ाकर व्यूज बटोरना गलत है। वर्तमान में यह मामला इंटरनेट पर 'रोस्टर्स बनाम रील मेकर्स' की एक ऐसी बड़ी बहस का हिस्सा बन चुका है, जिसने डिजिटल एथिक्स और फेयर यूज की सीमाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आने वाले समय में डिजिटल कंटेंट की सुरक्षा और आलोचना के बीच की रेखा और भी धुंधली और चुनौतीपूर्ण होने वाली है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
