भारतीय उद्यमी और एंजेल निवेशक नमिता थापर एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में हैं। मार्च 2026 में साझा किए गए उनके एक सोशल मीडिया वीडियो ने न केवल व्यापक चर्चा छेड़ी, बल्कि इसके बाद शुरू हुई तीखी ट्रोलिंग के खिलाफ उनका ताजा बयान भी सुर्खियों में आ गया है।

यह पूरा विवाद 25 मार्च 2026 को पोस्ट किए गए एक वीडियो से शुरू हुआ, जिसमें नमिता थापर ने अपने एक मित्र के साथ ईद मनाने के अनुभव को साझा किया। इस वीडियो में उन्होंने नमाज़ को “फुल-बॉडी एक्सरसाइज” बताते हुए इसके स्वास्थ्य लाभों पर प्रकाश डाला। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए कैप्शन में उन्होंने लिखा कि उनके मित्र ने उन्हें समझाया कि नमाज़ केवल एक सुंदर आध्यात्मिक अभ्यास ही नहीं, बल्कि इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं।



वीडियो में उन्होंने विस्तार से बताया कि नमाज़ करने से शरीर की लचीलापन बढ़ती है और घुटनों व जोड़ों के स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। उन्होंने इसे रक्त संचार के लिए लाभकारी बताया और कहा कि यह समग्र शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। साथ ही, उन्होंने इसके मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव का भी उल्लेख किया, इसे ध्यानपूर्ण और शांत करने वाला अभ्यास बताया। नमाज़ की कुछ मुद्राओं की तुलना उन्होंने योग के वज्रासन से करते हुए कहा कि यह पाचन में सहायता कर सकती है और दैनिक तनाव से राहत देने में भी सहायक है।

हालांकि, वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं और उन्हें बड़े पैमाने पर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। कई उपयोगकर्ताओं ने उनके बयान को लेकर आपत्ति जताई और व्यक्तिगत टिप्पणियां तक की गईं। इसी संदर्भ में 4 अप्रैल 2026 को, सोमवार के दिन, नमिता थापर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो जारी कर ट्रोलिंग का जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें व्यक्तिगत आलोचना की परवाह नहीं है और पिछले पांच वर्षों से, विशेष रूप से “शार्क टैंक” से जुड़े रहने के दौरान, वे इस तरह की प्रतिक्रियाओं की आदी हो चुकी हैं।



उन्होंने अपने संदेश में कहा कि इस वीडियो का उद्देश्य केवल यह अपील करना था कि देश के “गर्वित भारतीय” किसी भी गलत चीज़ को देखकर चुप न रहें, बल्कि मानवता और देशभक्ति के आधार पर आवाज उठाएं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एक साधारण वीडियो के कारण उन्हें और उनकी मां को अपमानजनक भाषा का सामना करना पड़ा।

अपने बयान में उन्होंने इस विरोधाभास की ओर भी इशारा किया कि जहां कुछ लोग महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर असंतोष जताते हैं, वहीं दूसरी ओर वे दो महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा के प्रयोग को स्वीकार्य मान लेते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब किसी व्यक्ति को अपमानित किया जाता है, तब चुप रहना अब विकल्प नहीं होना चाहिए, और समाज को बुनियादी मानवाधिकारों, मानवता और देशभक्ति के समर्थन में खुलकर सामने आना चाहिए।

इस विवाद के बीच एक समानांतर घटना भी चर्चा में रही, जिसमें पीयुष बंसल, जो Lenskart के सह-संस्थापक हैं, को कंपनी की ग्रूमिंग नीति को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा। इस नीति में कलावा, बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों पर प्रतिबंध की बात कही गई थी, जबकि बुर्का और पगड़ी को अनुमति दी गई थी, जिससे सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई।

नमिता थापर से जुड़ा यह पूरा घटनाक्रम न केवल सोशल मीडिया पर बढ़ती संवेदनशीलता और ध्रुवीकरण को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सार्वजनिक हस्तियों के बयान किस तरह व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श को जन्म दे सकते हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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