स्लिम दिखने के लिए खून में इंजेक्शन उतार रहीं दुल्हनें! आखिर क्या है शादियों में हो रही बायोहैकिंग?
भारतीय शादियों में इंजेक्शन और मेडिकल वेट लॉस का चलन तेजी से बढ़ा है। जानिए कैसे 'पिक्चर परफेक्ट' दिखने की चाहत में दूल्हा-दुल्हन अपनी सेहत से समझौता कर रहे हैं। इस लेख में मौंजारो के साइड इफेक्ट्स, इसकी भारी-भरकम कीमत और प्री-वेडिंग फिटनेस के नाम पर चल रहे इस खतरनाक ट्रेंड की पूरी पड़ताल की गई है।

भारतीय शादियों की भव्यता और चकाचौंध अब केवल भारी-भरकम गहनों, डिजाइनर लिबासों और शाही पकवानों तक सीमित नहीं रह गई है। सोशल मीडिया के इस दौर में, जहाँ हर रस्म 'इंस्टाग्राम रील' और 'पिक्चर परफेक्ट' फ्रेम के लिए होती है, वहाँ अब 'बायोहैकिंग' और 'मेडिकल वेट लॉस' जैसे आधुनिक ट्रेंड्स ने भी दस्तक दे दी है। हाल के दिनों में उच्च वर्ग और संपन्न परिवारों की शादियों में 'मौंजारो' (Mounjaro) नामक दवा का एक 'प्री-वेडिंग पैकेज' के रूप में उभरना फिटनेस और फार्मास्यूटिकल्स के एक विवादास्पद मेल को दर्शाता है, जो स्वास्थ्य जगत के विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
मौंजारो, जो मूल रूप से टिरजेपैटाइड (Tirzepatide) नामक सॉल्ट का ब्रांड नाम है, प्राथमिक रूप से टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए विकसित की गई थी। इसका वैज्ञानिक कार्य शरीर में GLP-1 और GIP जैसे हार्मोन्स की नकल करना है, जिससे पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है और मस्तिष्क को तृप्ति का आभास होता है। हालांकि, इस दवा का एक साइड इफेक्ट 'तेजी से वजन कम होना' है, जिसे अब भारतीय विवाह बाजार में एक मुख्य लाभ की तरह पेश किया जा रहा है। फिटनेस के पारंपरिक और धीमे रास्तों को दरकिनार कर, अब कई भावी दूल्हे और दुल्हनें इस 'मैजिक शॉट' का सहारा ले रहे हैं ताकि वे शादी के चंद महीनों पहले ही मनचाहा आकार पा सकें।
विवाह से पहले इस प्रकार के मेडिकल शॉर्टकट अपनाने के पीछे का सामाजिक दबाव गहरा है। लग्जरी वेलनेस क्लीनिक अब इन दवाओं को एक विशिष्ट पैकेज की तरह बेच रहे हैं, जहाँ डॉक्टर की निगरानी में ये इंजेक्शन दिए जाते हैं। लेकिन इस ग्लैमरस ट्रेंड का स्याह पक्ष इसके गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों में छिपा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन इंजेक्शनों की लागत न केवल लाखों में है, बल्कि इनके सेवन से होने वाली मतली, उल्टी और पाचन संबंधी गंभीर समस्याएँ शादी के उत्सव के आनंद को किरकिरा कर सकती हैं। इससे भी अधिक चिंताजनक यह है कि बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के इन दवाओं का 'ऑफ-लेबल' इस्तेमाल किडनी और पैनक्रियाज जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर दीर्घकालिक दुष्प्रभाव डाल सकता है।
कानूनी और नियामक दृष्टिकोण से देखा जाए तो भारत में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने कड़े नियमों के तहत ऐसी दवाओं की अनुमति दी है, और यह केवल वैध मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन पर ही उपलब्ध होनी चाहिए। फिर भी, बाजार में सौंदर्य की अंधी दौड़ में इन नियमों की अनदेखी कर वजन घटाने के लिए इनका धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों की राय स्पष्ट है कि इंजेक्शन बंद होते ही वजन पुनः बढ़ने और त्वचा की चमक खोने का जोखिम बना रहता है। अंततः, यह प्रवृत्ति हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या महज कुछ तस्वीरों के लिए अपनी जैविक सेहत को दांव पर लगाना बुद्धिमानी है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
