मजदूर की चालाकी देख इंजीनियर भी रह गए दंग! MGNREGA ऐप के साथ कर डाला ये खेला
MGNREGA की NMMS उपस्थिति प्रणाली को लेकर एक अजीब मामला वायरल हो गया है, जिसमें कथित तौर पर एक मजदूर ने मंदिर मुंडन के बाद बदले चेहरे के कारण पहचान से बचने के लिए सहकर्मी के बालों का इस्तेमाल किया। यह घटना डिजिटल उपस्थिति प्रणाली की जमीनी चुनौतियों और तकनीकी सीमाओं पर नई बहस छेड़ रही है।

मनरेगा डिजिटल उपस्थिति
ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) की डिजिटल उपस्थिति प्रणाली को लेकर एक हैरान करने वाला और तेजी से वायरल हुआ मामला सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर एक मजदूर ने मोबाइल आधारित फेस-रिकग्निशन उपस्थिति ऐप को चकमा देने के लिए अपने साथी के बालों का सहारा लिया। यह घटना सोशल मीडिया पर सामने आई रिपोर्टों और चर्चाओं के बाद सुर्खियों में आ गई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
मामला MGNREGA के तहत इस्तेमाल किए जाने वाले राष्ट्रीय मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) ऐप से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसके माध्यम से कार्यस्थलों पर मजदूरों की उपस्थिति लाइव फोटो और डिजिटल सत्यापन के जरिए दर्ज की जाती है। इसी प्रणाली के चलते यह घटना चर्चा का विषय बन गई है।
जानकारी के अनुसार, संबंधित मजदूर ने हाल ही में एक धार्मिक अनुष्ठान के तहत मंदिर में मुंडन कराया था, जिसके बाद उसका पूरा लुक बदल गया था। NMMS ऐप में उपस्थिति दर्ज कराने के लिए स्पष्ट चेहरे की तस्वीर आवश्यक होती है, और इसी कारण मजदूर को आशंका हुई कि बदले हुए रूप में उसकी पहचान प्रणाली या पर्यवेक्षक द्वारा अस्वीकार की जा सकती है।
Tech Fail! In the Mahabubabad dist, a labourer’s face was not recognised by the NMMS attendance app after he tonsured his head at a temple. Reportedly attendance worked only after he used a woman labourer’s hair cover for face authentication. Workers say app errors and network… pic.twitter.com/KacfPciAR0
— Ashish (@KP_Aashish) May 29, 2026
इसी आशंका के चलते, कथित रूप से मजदूर ने अपने सहकर्मी की मदद ली और उपस्थिति सेल्फी लेते समय अपने सिर पर सहकर्मी के बालों का सहारा लेकर एक असामान्य तरीका अपनाया, ताकि तस्वीर में सामान्य रूप जैसा प्रतीत हो सके। सोशल मीडिया पर साझा किए गए स्क्रीनशॉट्स में इसी तरह की असामान्य उपस्थिति दिखाई देने का दावा किया गया, जिसके बाद यह मामला तेजी से वायरल हो गया।
NMMS प्रणाली को MGNREGA कार्यस्थलों पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने, फर्जी उपस्थिति रोकने और मजदूरी भुगतान प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया था। इस प्रणाली में कार्यस्थल की जीओ-टैग्ड और टाइम-स्टैम्प्ड तस्वीरों के माध्यम से उपस्थिति दर्ज की जाती है, जिससे रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जा सके।
हालांकि, इस डिजिटल प्रणाली को लेकर कई व्यावहारिक समस्याएं भी सामने आती रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी, फोटो अपलोड न होना, तकनीकी त्रुटियों के कारण उपस्थिति दर्ज न हो पाना, और कभी-कभी काम करने के बावजूद मजदूरों का अनुपस्थित दिखना जैसी शिकायतें समय-समय पर सामने आई हैं। इसके अलावा, यह भी देखा गया है कि प्रणाली की सटीकता कई बार फोटो गुणवत्ता और चेहरे की पहचान पर अत्यधिक निर्भर हो जाती है।
इसी पृष्ठभूमि में इस तरह की घटनाएं डिजिटल उपस्थिति प्रणाली की जमीनी चुनौतियों और उसकी सीमाओं पर चर्चा को फिर से तेज कर देती हैं। यह मामला किसी आधिकारिक सरकारी जांच या पुष्टि का हिस्सा नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं के आधार पर सामने आया एक वायरल प्रसंग माना जा रहा है, जो MGNREGA प्रणाली से जुड़ी आम समस्याओं की ओर संकेत करता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
