प्रणीत मोरे, हिमांशु जांगड़ा और डॉ. सेजल पवार महाराष्ट्र साइबर ने दर्ज की FIR, जानें अब तक की सारी अपडेट
महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने कॉमेडियन प्रणीत मोरे, हिमांशु जांगड़ा और डॉ. सेजल पवार समेत अन्य लोगों के खिलाफ कथित अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट के प्रसार को लेकर एफआईआर दर्ज की है। वायरल ‘370 रुपये बिरयानी’ विवाद, महिलाओं की गरिमा, सहमति और सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री को लेकर जांच तेज हो गई है।

कॉमेडियन प्रणीत मोरे और अन्य पर FIR
स्टैंड-अप कॉमेडी और सोशल मीडिया कंटेंट की सीमाओं को लेकर एक बार फिर देशभर में बहस छिड़ गई है। महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने कॉमेडियन प्रणीत मोरे, हिमांशु जांगड़ा, डॉ. सेजल पवार और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ कथित अश्लील, आपत्तिजनक और सामाजिक मर्यादाओं के विरुद्ध सामग्री के प्रसार को लेकर एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई उन वायरल वीडियो क्लिप्स के सामने आने के बाद की गई है, जिन्होंने सोशल मीडिया पर व्यापक विवाद और तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दीं।
यह मामला एक क्राउड-वर्क कॉमेडी शो से जुड़ा है, जिसकी मेजबानी कॉमेडियन प्रणीत मोरे कर रहे थे। शो के दौरान दर्शक के रूप में मौजूद हिमांशु जांगड़ा की एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। वीडियो में जांगड़ा ने कथित तौर पर अपने डेटिंग अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि चूंकि उन्होंने चिकन बिरयानी पर 370 रुपये खर्च किए थे, इसलिए उन्हें बदले में शारीरिक संबंध की उम्मीद थी। इसके बाद उन्होंने कथित रूप से ऐसे व्यवहार का वर्णन किया, जिसे कई लोगों ने बिना सहमति वाले संबंधों को सामान्य बनाने वाला और महिलाओं की गरिमा के खिलाफ बताया।
वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। बड़ी संख्या में लोगों ने इस टिप्पणी को महिलाओं के प्रति अपमानजनक बताते हुए इसकी निंदा की। इसी विवाद के बीच "#BiryaniIsNotConsent" अभियान भी सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा, जिसने सहमति और महिलाओं के सम्मान के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया।
महाराष्ट्र साइबर पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आया कि संबंधित वीडियो और क्लिप्स यूट्यूब, इंस्टाग्राम तथा अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक रूप से प्रसारित किए गए। पुलिस का कहना है कि इन वीडियो में महिलाओं, सहमति और मृत व्यक्तियों से जुड़े ऐसे कथित आपत्तिजनक और अश्लील बयान शामिल हैं, जो समाज में स्वीकृत नैतिक और कानूनी मानकों के विपरीत हैं।
इसी आधार पर महाराष्ट्र साइबर ने नोडल साइबर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया है। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 75(1)(iv), 75(3), 294 और 353(2) के तहत दर्ज की गई है। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67 भी लगाई गई है, जो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से अश्लील सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण से संबंधित है।
प्रणीत मोरे के खिलाफ जांच का आधार सीधे तौर पर विवादित टिप्पणी करना नहीं है। जांच एजेंसियों का कहना है कि संबंधित बयान उनके द्वारा होस्ट किए गए कार्यक्रम के दौरान दिए गए थे। साथ ही, इन क्लिप्स को रिकॉर्ड कर आधिकारिक डिजिटल माध्यमों से प्रसारित किया गया और कथित रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रचारित तथा मोनेटाइज भी किया गया। जांचकर्ता यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या शो के आयोजकों और कंटेंट निर्माताओं की भूमिका इस सामग्री के प्रसार में रही है।
विवाद के दौरान सोशल मीडिया पर कई लोगों ने प्रणीत मोरे की भी आलोचना की। आलोचकों का आरोप है कि विवादित टिप्पणियों के दौरान उन्होंने हस्तक्षेप करने या आपत्ति जताने के बजाय हंसते हुए प्रतिक्रिया दी। हालांकि, यह तय करना कि इससे किसी प्रकार की कानूनी जिम्मेदारी बनती है या नहीं, जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही संभव होगा।
इस मामले में डॉ. सेजल पवार का नाम भी सामने आया है। एक अन्य वायरल वीडियो क्लिप में उन्होंने कथित तौर पर मृत पुरुषों के शवों और मेडिकल शिक्षा में उपयोग होने वाले कैडवरों को लेकर आपत्तिजनक और अश्लील टिप्पणियां की थीं। महाराष्ट्र साइबर का आरोप है कि यह सामग्री मृतकों की गरिमा के प्रति असम्मानजनक है और सार्वजनिक शालीनता के स्थापित मानकों के खिलाफ जाती है।
जांच के दौरान महाराष्ट्र साइबर ने प्रणीत मोरे, हिमांशु जांगड़ा और डॉ. सेजल पवार को समन जारी कर पूछताछ और बयान दर्ज कराने के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सामग्री के प्रसार की भूमिका का भी परीक्षण किया जा रहा है। इस विवाद ने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) का भी ध्यान आकर्षित किया है। आयोग ने कथित तौर पर वायरल "370 रुपये बिरयानी" टिप्पणी का संज्ञान लिया है और मामले से जुड़े पक्षों को नोटिस एवं समन जारी किए हैं। इससे यह मामला केवल सोशल मीडिया विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
फिलहाल मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है, समन जारी किए जा चुके हैं और जांच जारी है। अभी तक किसी अदालत ने किसी भी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया है और सभी आरोप जांच के दायरे में हैं। हालांकि, यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रहा है कि स्टैंड-अप कॉमेडी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सार्वजनिक शालीनता और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित होने वाली सामग्री की जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
